नवादा सांसद ने मानव संसाधन मंत्री को लिखा पत्र, जेईई नीट की परीक्षा तिथि बढाने का किया अनुरोध

नवादा सांसद ने मानव संसाधन मंत्री को लिखा पत्र, जेईई नीट की परीक्षा तिथि बढाने का किया अनुरोध

NAWADA : नवादा के सांसद चन्दन सिंह ने केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरिवाल को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने लिखा है की NEET की परीक्षा में शामिल होने जा रहे करीब 20 लाख बच्चों की समस्या आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ. कोरोना एवं लॉक डाउन के चलते परीक्षा में शामिल होने वाले बच्चे एवं इनके अविभावक काफी चिंतित है एवं बहुत सारे लोग हामसे मिलकर या फोन के माध्यम से होने वाले परेशानी से अवगत कराया है. NEET की परीक्षा 13 सितम्बर को निर्धारित है. अब लात्र / छात्राओ के लिए एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया है. इसी संदर्भ में कई छात्र / छात्राओ एवं इनके अविभावक के द्वारा मुझे सूचना दी गई है कि एडमिट कार्ड में जो परीक्षा केंद्र दिया गया है. 

वह छात्र / छात्राओं के द्वारा दिया गया CHOICE CENTRE को नजरअंदाज करते हुए मनमाने तरीके से परीक्षा केंद्र दिया गया है. बिहार के छात्र / छात्राओ को महाराष्ट्र , कोलकता , हैदराबाद या देश के अन्य शहरों में परीक्षा केंद्र दिया गया है, जोकि कोरोना काल के गलत है. उन्होंने लिखा है की अभी पूरे देश में कोरोना अपने चरम पर है. प्रतिदिन कोरोना के करीब 80 हजार नए केश आ रहे है एवं कई छात्र एवं इनके अविभावक भी कोरोना से संक्रमित है. ऐसी परिस्थिति में यह कैसे संभव होगा कि निर्धारित किये गए केंद्र पर छात्र / छात्राएं जाकर परीक्षा दे सके. 

खासकर एक बात मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ जिससे आप भी सहमत होंगे. कुछ दिन पहले बिहार के एक SP रैक के अधिकारी जांच के सिलसिले में मुंबई गए थे. वहाँ की सरकार के द्वारा जबरन 15 दिन क्वारेंटिन कर दिया गया था, फिर इन बच्चों कि क्या दशा होगी. यह सोचने वाली बात है. इसे लेकर भी अविभावकों में चिंता एवं भय है. NEET की परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की उम्र 17 से 19 वर्ष के बीच होती है, जिसके चलते छोटे बच्चों के साथ अविभावक को भी जाना होगा. उन्होंने लिखा है की बिहार एक गरीब राज्य है. 


यहाँ प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है, जिसके चलते मुझे यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि इन गरीब छात्रों एवं इनके अविभावक को बाहर जाकर परीक्षा दिलवाने में आर्थिक परेशानी होगी एवं इससे संक्रमण बहने का खतरा भी रहेगा. देश में यातायात का मुख्य साधन रेल मार्ग है. लेकिन अभी गिने चुने रेलगाड़ी ही चल रही है. जिसमे अभी सभी लोगों को आरक्षण मिलना संभव नहीं है. इसके साथ बच्चे बाहर जाएगे . तब रुकेगे कहाँ एवं क्या खाएंगे यह सब अंधकारमय है. क्योकि अभी भी अधिकांश जगहो पर लॉकडाउन है.  इन बच्चों का भरोसा आप पर है और में आपको एक अभिभावक मानकर इन बच्चों की बात आप तक पहुचाने की कोशिश की है. आशा करता हूँ कि इस चितनीय विषय पर आप निजी दिलचस्पी लेंगे. अत उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं छात्र / छात्राओ के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए जहां तक संभव हो सके. परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ाया जाये एवं अगर यह संभव नहीं है. तब परीक्षार्थी के द्वारा दिया गया CHOICE CENTRE पर ही परीक्षा आयोजित करवाने हेतु संबन्धित पदाधिकारी को निर्देशित करने की कृपा करेंगे. 

नवादा से अमन सिन्हा की रिपोर्ट 


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