पटना कमिश्नर के गायब रहने पर बीजेपी का तंज,फोटो खिंचाने वाले साहब को राजधानी की जनता खोज रही,सुनने में आया है कि विदेश घुमने गए हैं....

पटना कमिश्नर के गायब रहने पर बीजेपी का तंज,फोटो खिंचाने वाले साहब को राजधानी की जनता खोज रही,सुनने में आया है कि विदेश घुमने गए हैं....

PATNA: पटना कमिश्नर आनंद किशोर पर बीजेपी ने तंज कसा है।बीजेपी ने कहा है कि राजधानी की जनता साहब को खोज रही है....सुनने में आया है कि वे विदेश घुमने गए हैं।बिहार बीजेपी के प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने ट्वीट पर पटना कमिश्नर आनंद किशोर पर तंज कसते हुए कहा कि ...पटना की जनता अपने कमिश्नर को तलाश रही है। अतिक्रमण हटाना या ट्रैफिक रुल्स लागू कराना, इन अवसरों का इस्तेमाल हमेशा फोटो-ऑप के लिए करते थे।जब से पटना में जलजमाव के कारण त्रासदी की स्थिति है तो जनाब पूरे सीन से गायब है। सुनने में आया है कि विदेश घुमने या ज्ञान अर्जित करने गए है।

उधर सोशल साईट पर भी राजधानी वासी अगर सबसे अधिक किसी को खोज रहे तो वे हैं पटना के कमिश्नर. हजारों की आबादी कमिश्नर साहब के लिए टकटकी लगाए हुए है। पांच दिनों बाद भी उनके दर्शन नहीं होने के बाद अब लोग सोशल साईट पर पूछने लगे हैं कि हमारे कमिश्नर साहब ठीक तो हैं न....पिछले पांच दिनों से वे कहीं दिख नहीं रहे....अचानक कहां गायब हो गए....?फेसबुक और ट्वीटर के माध्यम से राजधानी के लोग पटना के कमिश्नर का कुशल क्षेम ले रहे। पूछ रहे कि क्या आपने कहीं कमिश्नर साहब को देखा है? अगर साक्षात नहीं देखा तो कहीं उनकी तस्वीर भी देखी है क्या...? लोग पूछ रहे कि वे टीवी या अखबार में भी पिछले पांच दिनों में दिखे हैं क्या....? इस तरह के सवाल सोशल साइट के माध्यम से पूछे जा रहे हैं।

चालान काटते सड़कों पर दिख जाते थे साहब

एक तरह से कहें तो कमिश्नर सोशल साईट पर ट्रोल हो रहे हैं। राजधानीवासी पूछ रहे कि जो कमिश्नर  बाइक का चालान काटने के लेकर दिन-दिन भर सड़कों पर घुमा करते थे वे अचानक कहां चले गए? जिस काम को पटना के डीएम ,परिवहन विभाग के कर्मी और यातायात पुलिस कर सकती थी उसके लिए कमिश्नर साहब खुद सड़कों पर धूल फांक रहे थे ,वैसे कर्मठ आयुक्त विपदा की घड़ी में अचानक कहां गायब हो गए। लोग पूछ रहे कि पटना डीएम के काम को खुद अपने मत्थे पर उठाने वाले कमिश्नर साहब डीएम को अकेले छोड़ कहां चले गए। डीएम साहब ट्रैक्टर कर बैठ कर दिन रात आपदा पीड़ितों की सेवा में लगे हैं...क्या साहब को सिर्फ गाड़ी चेकिंग और तोड़फोड़ करने के लिए हीं पटना का कमिश्नर बनाया गया था? क्या उनकी यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे भी आपदा की इस घड़ी में डीएम को मदद करते....।

तमाम तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं,लेकिन सारे सवाल अनुत्तरित रह जा रहे हैं।क्यों कि किसी के पास कोई जानकारी नहीं है।पिछले पांच दिनों में किसी ने न तो मीडिया के माध्यम से उनको देखा है और न सड़को पर या फिर जलजमाव वाले इलाकों में......।

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