पटना डीटीओ ऑफिस फर्जीवाड़ा, एक्शन लेने से पटना पुलिस को किसने बांधे हाथ?

पटना डीटीओ ऑफिस फर्जीवाड़ा, एक्शन लेने से पटना पुलिस को किसने बांधे हाथ?

PATNA : बिहार में गुड गवर्नेंस केबावजूद सरकार के नाक नीचे पटना डीटीओ कार्यालय में गड़बड़ी का खेल चल रहा है। कई बार मामले के खुलासे के बाद भी सरकारी कर्मियों पर कोई कार्रवाई नही हुई। 2018 में पटना डीटीओ कार्यालय में फर्जीवाड़ा के तीन गंभीर मामले सामने आए। उन मामलों मे ऑफिस के एक रसूखदार कर्मी का नाम सामने आया था। दोनों मामलों में गांधी मैदान थाना मे केस भी दर्ज हुआ, लेकिन पुलिस भी जांच के नाम पर फाईल पर कुंड़ली मारकर बैठी है। अबतक पुलिस के स्तर से कोई कार्रवाई नही हुई है।

पटना डीटीओ ऑफिस का पहला मामला

पटना DTO कार्यालय मे फर्जीवाड़े का पहला मामला उस समय सामने आया जब कार्यालय के अधिकारियों ने अपने कारनामे से मृत व्यक्ति को जिंदा कर दिया। बता दें कि 19 मई, 2017 को गोपालगंज में भाजपा नेता कृष्णा शाही की हत्या अपराधियों ने कर दी थी। मौत के बाद उनकी गाड़ी को दूसरे के नाम पर कर दिया गया। दरअसल पूरा मामला यूं है कि शांता शाही जब 13 जून 2018 को पटना डीटीओ कार्यालय अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी, जिसका नंबर BR01-PB4906  का बीमा कराने पहुंची तो वहां उन्हें बताया गया कि आपकी गाड़ी का बीमा हो चुका है।यह जानकर वह दंग रह गईं। उन्होनें पटना डीटीओ ऑफिस के कर्मियों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा गांधी मैदान थाने मे मामला दर्ज कराई। पीड़िता ने सीधे तौर पर ऑफिस के कर्मचारियों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा मामला दर्ज कराया था, लेकिन सात माह बाद भी उस मामले मे दोषी सरकारी कर्मियों पर कोई कार्रवाई नही हुई।

दूसरा मामला.........

वहीं परिवहन आयुक्त के आदेश पर23 जून 2018 को पटना डीटीओ कार्यालय में छापेमारी हुई थी। छापेमारी में पकड़े गए दलाल ने पुलिस के समक्ष ऑफिस के एक रसूखदार कर्मी का नाम लिया था। गिरफ्तार शख्स ने पुलिस के समक्ष  परिवहन कार्यालय के फर्जीवाड़े की पोल खोली थी। पूछताछ में उसने डीटीओ कार्य़ालय के रसूखदार कर्मी गौतम कुमार औरअन्यके नाम लिये थे। तब गांधी मैदान पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। उस वक्त टाउन डीएसपी सुरेश कुमार ने कहा था कि मामला गंभीर है और इस केस को वो खुद देख रहे हैं। लेकिन इस मामले को भी गांधी मैदान थाने की पुलिस ने ठंडे बस्ते मे डाल दिया। इतने दिन बीतने के बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग के स्तर से कोई कार्रवाई नही हुई।

अब 7 महीने बाद क्या कहते हैं टाउन डीएसपी

अब मामले के 7 माह बीत जाने के बाद इस मामले पर टाउन डीएसपी सुरेश कुमार कहते हैं कि मामले की जांच जारी है। डिटेल फाईल देखकर बताउंगा। 

बता दें कि एक तरफ पटना डीआईजी सभी जांच अधिकारियों को जल्द से जल्द जांच कर रिपोर्ट जारी करने का आदेश दे रहे। लेकिन राजधानी पटना की यह स्थिति है कि 7 महीने बाद भी जांच वाली फाईल हाकिम के दफ्तरों मे धूल फांक रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जांच और कार्रवाई से पुलिस के हाथ किसने रोक रखे हैं।

विवेकानंद की रिपोर्ट

Find Us on Facebook

Trending News