पटना हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर की सुनवाई, केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय से किया जवाब तलब

पटना हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर की सुनवाई, केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय से किया जवाब तलब

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के इंतज़ार मे पिछले तीन साल से जहानाबाद के जेल में बंद एक पाकिस्तानी नागरिक को रिहा करने के मामले में संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से जवाब तलब किया है। जस्टिस ए एम बदर और जस्टिस संदीप कुमार की खंडपीठ ने अफसाना नगर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया।  


याचिकाकर्ता के पति सैयद नक्वी आलम उर्फ नकवी इमाम का जन्म भारत में ही सन 1973 में हुआ था और 11 साल की उम्र में वह अपनी नानी के साथ 1984 में पाकिस्तान चला गया। वहीं पढ़ाई लिखाई करते हुए पाकिस्तानी नागरिकता हासिल कर बस गया था।

अपनी पिता तबीयत खराब हो जाने की खबर पर आलम उन्हें देखने के लिए 1 साल का पासपोर्ट वह पाकिस्तान से भारत आया। बिहार के अरवल में अपने पिता की देखरेख करने लगा। पासपोर्ट की मियाद फरवरी 2012 में खत्म होने के बाद आलम को ओवर स्टे प्रभावी कानून को तोड़ने की जुर्म में बिहार पुलिस ने आलम पर क्रिमिनल मुकदमा दर्ज किया।

इसमें आलम को 3 साल कैद की सजा होगी। सजा के खिलाफ अपील दायर कर जमानत पर रिहा होने के कारण आलम 2016 में याचिकाकर्ता के साथ मुस्लिम रीति रिवाज से शादी भी कर बैठा। याचिकाकर्ता के वकील नारायण ने कोर्ट को बताया की आलम अपने पिता की खराब स्वास्थ्य के आधार पर भारत में ही रहने हेतु भारत की नागरिकता के लिए पासपोर्ट की मियाद खत्म होने से पहले ही सक्षम पदाधिकारी के सामने आवेदन दे चुका था। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी उच्चायोग ने आलम को पाकिस्तानी नागरिक मानने से इनकार भी कर दिया। ऐसी स्थिति में केंद्र और राज्य सरकार आलम को डिटेंशन सेंटर में, जो जहानाबाद जेल में स्थित है, फरवरी 2020 से बंद कर रखा है। कोर्ट ने बिहार सरकार से यह पूछा है कि डिटेंशन सेंटर जेल के अंदर क्यों है इस मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी। 

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