पटना हाईकोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं के मामले पर की सुनवाई, राज्य सरकार को कार्रवाई का ब्यौरा देने का दिया निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं के मामले पर की सुनवाई, राज्य सरकार को कार्रवाई का ब्यौरा देने का दिया निर्देश

PATNA : बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने के लिए 2 नवंबर,2022 तक का समय दिया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की। 


राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि स्टेट मेन्टल हेल्थ फंड के मद में धनराशि दी गई है। कोर्ट ने जानना चाहा कि स्टेट मेन्टल हेल्थ रिव्यू बोर्ड का गठन कब तक हो जाएगा। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता आकांक्षा मालवीय को कोर्ट ने पूरी जानकारी देने को कहा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था। साथ ही इसमें सुधारने के उपाय पर सलाह देने को कहा।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने बताया कि नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा हैं। लेकिन इसमें स्टाफ की संख्या काफी कम  है। हर जिले में सात सात स्टाफ  होने चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मेन्टल हेल्थ केयर एक्ट के तहत  कानून बनाए।साथ ही इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और फंड उपलब्ध कराए। लेकिन अबतक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

कोर्ट को ये भी बताया गया था कि सेन्टर ऑफ एक्सलेंस  के तहत हर राज्य में मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कॉलेज है। लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं,जहां मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कोई कालेज नहीं है। जबकि प्रावधानों के तहत राज्य सरकार का ये दायित्व है। पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं। उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर है। इस मामलें पर अगली सुनवाई 2 नवंबर,2022 को होगी।

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