चिराग पासवान की राजनीतिक 'कमाई' की खुल गयी पोल-पट्टी, पटना में आज कोई भी बड़ा नेता नहीं आया सामने, तस्वीर ही सबकुछ बयां कर रहा...

 चिराग पासवान की राजनीतिक 'कमाई' की खुल गयी पोल-पट्टी, पटना में आज कोई भी बड़ा नेता नहीं आया सामने, तस्वीर ही सबकुछ बयां कर रहा...

PATNA: लोजपा की लड़ाई सड़कों पर आ गई है।पार्टी पर कब्जा को लेकर चाचा-भतीजा के जंग जारी है। दिल्ली में तख्ता पलट के बाद चिराग के चाचा पशुपति कुमार पारस आज पटना पहुंचे. पशुपति कुमार पारस के साथ पार्टी के कद्दावर नेता सूरजभान सिंह और सांसद चंदन सिंह भी थे। पटना एयरपोर्ट पर जब पारस-सूरजभान सिंह पहुंचे तो समर्थकों का हुजूम उमड़ा हुआ था। सैकड़ों की संख्या में लोग अपने नेता को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे। इस दौरान मुट्ठी भर चिराग समर्थकों की एक न चली। विरोध की मंशा पाले चिराग समर्थक डर के मारे एयरपोर्ट पर विरोध भी नहीं कर सके। पशुपति कुमार पारस सीधे प्रदेश कार्यालय पहुंचे और वहां चिराग पासवान पर बड़ा हमला बोला। पारस ने सीधा कहा कि लोजपा में एक नेता-एक पद का सिद्धांत है। इसी आधार पर चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाया गया है। पटना की सड़कों पर आज चाचा भतीजे की राजनीतिक लड़ाई में चिराग पासवान की पॉलिटिकल कमाई का भांडा फूट गया।

चिराग की राजनीतिक कमाई की खुल गई पोल-पट्टी

दरअसल चिराग पासवान की राजनीतिक कमाई का भांडा उस समय फूटा जब उनके पक्ष में चंद लोग ही सामने आए। दिल्ली में तख्तापलट के बाद पशुपति कुमार पारस और सूरज भान सिंह जब वापस पटना एयरपोर्ट पहुंचे और फिर वहां से लोजपा दफ्तर गए इस दौरान चिराग पासवान की वास्तविक राजनीतिक कमाई की कलई खुल गई। पटना एयरपोर्ट से लेकर लोजपा दफ्तर तक कोई भी बड़ा नेता पारस और सूरज भान सिंह के विरोध में नहीं दिखा। मुट्ठी भर लोग जिनकी संख्या अधिकतम 20 से 25 की रही होगी वही विरोध करते दिखे। चिराग के समर्थन में जो लोग विरोध कर रहे थे वह नवयुवक थे। बाकी कोई भी नेता चिराग के पक्ष में सड़कों पर नहीं दिखा। लोजपा दफ्तर में तो किसी ने चिराग पासवान के समर्थन में कोई नहीं आया। गेट पर कुछ युवकों ने दिखावे के लिए विरोध जरूर किया लेकिन पुलिस ने उन्हें भी खदेड़ दिया।

लोजपा दफ्तर से पारस का चिराग पर अटैक 

लोजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत में पशुपति कुमार पारस ने कहा कि चिराग ने जो बातें कही है वो पूरी तरह से गलत है। जब लोकसभा अध्यक्ष ने हमें लोकसभा में पार्टी का नेता घोषित कर दिया तो पार्लियामेंट्री बोर्ड क्या होता है ? चिराग पासवान एक साथ पार्लियामेंट्री बोर्ड के अध्यक्ष,सदन में नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल रहे थे जो पूरी तरह से गलत था। पार्टी संविधान में स्पष्ट उल्लेख है कि एक नेता-एक पद धारण करेगा। उन्होंने कहा कि लोजपा की बैठक में चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। अब कल गुरूवार को लोजपा की बैठक होगी जिसमें तय होगा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा। 


लोजपा कार्यालय पर पारस का कब्जा

पटना एयरपोर्ट से पशुपति कुमार पारस सीधे लोजपा प्रदेश कार्यालय गये। वे वहां दफ्तर में अपने समर्थकों के साथ ठोक कर बैठे रहे और लोगों से मुलाकात करते रहे। चिराग के कुछ समर्थकों ने विरोध भी दर्ज किया लेकिन पारस समर्थकों की भारी हुजूम की वजह से चिराग समर्थकों की एक न चली। इस तरह से चिराग पासवान का गुट प्रदेश कार्यालय में पशुपति कुमार पारस को घुसने से रोकने में विफल गया और पूरी प्लानिंग फेल कर गई। जानकार बताते हैं कि चिराग पासवान का गुट पारस-सूरजभान सिंह के विरोध की पूरी तैयारी की थी। कुछ लोगों को जुटाया भी गया था। लेकिन जिस तरह की तैयारी सूरजभान सिंह की तरफ से की गई थी उसमें चिराग समर्थकों की हवा निकल गई। हालांकि प्रदेश कार्यालय के समीप चिराग समर्थकों ने पारस का रास्ता रोकने की कोशिश की। इस दौरान दोनों तरफ के समर्थक उलझ गये। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। फिर सारे चिराग समर्थक जो काला झंड़ा दिखा रहे थे वे भाग खड़े हुए।

तीन दिन बाद चिराग आये सामने 

इधर दिल्ली से चाचा पारस पटना के निकले तो भतीजा चिराग पासवान पहली बार मीडिया के सामने आए। उन्होंने चाचा पशुपति कुमार पारस पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी ने समझौते की बजाय संघर्ष का रास्‍ता चुना था। पिता के निधन के बाद उन्‍होंने परिवार और पार्टी दोनों को लेकर चलने का काम किया। इसमें संघर्ष था। जिन लोगों को संघर्ष का रास्‍ता पसंद नहीं था, उन्‍होंने ही धोखा दिया। चाचा बोलते, तो पहले ही संसदीय दल का नेता बना देता।उन्होंने कहा कि लोजपा को पहले भी तोड़ने की कोशिश की गई थी।

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