पटना में प्रदूषण-फिटनेस जांच के नाम पर लाखों रू की सरकारी राशि का अपव्यय...! पहले मशीन के साथ MVI की लगती थी ड्यूटी..अब लाईसेंसधारक को मिला जिम्मा

पटना में प्रदूषण-फिटनेस जांच के नाम पर लाखों रू की सरकारी राशि का अपव्यय...! पहले मशीन के साथ MVI की लगती थी ड्यूटी..अब लाईसेंसधारक को मिला जिम्मा

पटनाः  राजधानी पटना में वाहनों के प्रदूषण-फिटनेस जांच के नाम पर लाखों की सरकारी राशि के अपव्यय की बात सामने आ रही है।इसके पहले जितने भी जांच हुए हैं उसमें मशीन के साथ एमवीआई की ड्यूटी लगती थी।लेकिन इस बार एमवीआई को खाली हाथ बुलाया गया है। जांच के लिए बाहर से लाईसेंसधारी केंद्रों को हायर किया गया है।तर्क यह दिया गया है कि बिहार सरकार के मोटरयान निरीक्षक को दिया गया प्रदूषण-फिटनेस जांच मशीन बेकार हो गया है।

विभाग के अधिकारी अब खुद स्वीकार कर रहे कि एमवीआई को दिया गया मशीन आउटडेटेड हो गया है।इसलिए राजधानी पटना में वाहनों के प्रदूषण-फिटनेस जांच अभियान के लिए 5 निजी लाईसेंसधारी की सेवा ली जा रही है।बदले में प्रति दिन के हिसाब 30 हजार रू का भुगतान किया जा रहा है।15 दिनों तक उन लाईसेंसी की सेवा ली जाएगी बदले में सरकार का लाखों रू खर्च होंगे।  

8 एमवीआई की लगी है ड्यूटी

बता दें कि मुख्यसचिव के आदेश के बाद राजधानी में 5 जगहों पर प्रदूषण और फिटनेस जांच का अभियान चल रहा है। जांच अभियान में बिहार के 8 एमवीआई और प्रवर्तन अवर निरीक्षक को बिना जांच मशीन के लगाया है।एमवीआई की मशीन की जगह विभाग ने 5 निजी लाईसेंसधारी जांच केंद्रों को इस अभियान में लगाया है। यह अभियान 17 अगस्त से 31 अगस्त तक चलेगी।

जनवरी 2019 में एमवीआई की मशीन के साथ लगी थी ड्यूटी

इसके पहले के जांच अभियान में सभी एमवीआई को सरकारी जांच मशीन के साथ राजधानी की सड़कों पर वाहन का प्रदूषण-फिटनेस जांच कराई थी।परिवहन विभाग ने 11-12 जनवरी को राजधानी के 5 जगहों पर प्रदूषण जांच के लिए एमवीआई की तैनाती की थी।विभाग ने सभी 5 एमवीआई को सरकार के तरफ से दी गई स्मोकमीटर एवं गैस एनालाईजर के साथ आने को कहा गया था और उसी मशीन से जांच के आदेश दिए गए थे। तब इस काम में सरकार का किसी तरह का अपव्यय नहीं हुआ था।लेकिन इस बार एमवीआई को बिना मशीन के प्रतिनियुक्त किया गया है।बदले में निजी केंद्रों की मदद ली जा रही है।

क्या कहते हैं पटना के डीटीओ

इस संबंध में जब पटना डीटीओ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि एमवीआई के पास से जो मशीन दी गई है वह आउटडेटेड हो गई है।उस मशीन को सही तरीके से इंस्टॉल नहीं किया गया है।इसलिए निजी लाईसेंसधारी की सेवा ली जा रही है।उन्होंने कहा कि इसमें कोई गलत नहीं है।जहां तक मशीन खराब होने की बात है तो एमवीआई  उस मशीन से फिटनेस-प्रदूषण की जांच नहीं करते।बल्कि विभाग ने इसकी जांच के लिए लाईसेंस दिया है वही से जांच होती है। 


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