पटना पुलिस की कवच से बाहर है बाकरगंज की 450 दुकानें, दरभंगा कांड के बाद दहशत में बोल रहे हैं व्यापारी 'सुरक्षा दो सरकार'

पटना पुलिस की कवच से बाहर है बाकरगंज की 450 दुकानें, दरभंगा कांड के बाद दहशत में बोल रहे हैं व्यापारी 'सुरक्षा दो सरकार'

पटना... 9 दिसंबर को सीएम नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास में कानून-व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। इधर, सूबे के कुछ जिलों में सीएम की मीटिंग के समय ही अपराधी घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। बता दें कि समीक्षा बैठक से कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने विधि-व्यवस्था पर हाईलेवल मीटिंग की थी और सूबे में अपराध रोकेने के लिए पुलिस अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी थी। इसके बावजूद भी अपराधियों में कोई खौफ नजर नहीं आया। खास तौर पर जब बुधवार को सीएम समीक्षा बैठक कर रहे थे, तभी दरभंगा के सर्राफा बाजार में बदमाशों ने लूट का तांडव जमकर मचाया और कानून व्यवस्था पर इतना बड़ा तमाचा मारा कि उसकी गूंज बैठक तक सुनाई दी, लेकिन इस तमाचे के बाद भी पुलिस और प्रशासन में ऐसी अकड़न है कि उन्हें किसी से कोई लेना-देना नहीं है। 

आपको बता दें कि दरभंगा में घटित वारदात के बाद पटना के इतने बड़े सर्राफा बाजार के व्यापारी खौफ में जीने के मजबूर हो गए हैं। दरअसल, बिहार-झारखंड समेत यूपी, बंगाल और उड़ीसा के बॉर्डर इलाकों को मिलाकर सबसे बड़ा सर्राफा बाजार राजधानी पटना में हैं। बाकरगंज में तकरीबन 450 दुकानें कारण राजधानी के बाकरगंज में स्थित सर्राफा व्यपारियों के पास किसी तरह की सुरक्षा का नहीं होना। व्यपारियों की मानें तो वो कई बार पुलिस प्रशासन से मिलकर उन्हें सुरक्षा के दयनीय हालात के बाारे में बता चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके यहां एक अदद गश्त तक नहीं लगाई जाती है। 

सर्राफा व्यापारी शशिभूषण मंटू ने बताया कि राजधानी का बाकरगंज बिहार का ही नहीं बल्कि यूपी, बंगाल और उड़ीसा के कुछ बॉर्डर इलाकों को ले लीजिए तो यह सबसे बड़ा बाजार है। यहां बड़े स्तर पर व्यापारी लोग आते हैं और रोजना करोड़ों का लेन-देन होता है। उस हिसाब से यहां सिक्योरिटी का कोई इंतजाम नहीं है। व्यापारियों ने बताया कि पुलिस को दिन में मॉनिटरिंग करना चाहिए , लेकिन पुलिस की लचर व्यवस्था के कारण हमारा व्यापार भगवान भरोसे ही है। प्रशासन को यहां की सिक्योरिटी बनानी चाहिए। 

सर्राफा व्यापारियों में शामिल संजय भाेंसले ने कहा कि बाहर से जो आने वाले व्यापारी हैं, खासतौर से लगन के समय में जो आते हैं वो अपनपे आप काे सुरक्षित नहीं मानते हैं। अगर यहां पर मार्केट ब्लॉक हो जाएगा तो बहुत मुश्किल हो जाएगा। यहां पर कोई सुरक्षा को लेकर कोई भी पुख्ता इंतजाम नही है। हमें यहां पर्सनल लेवल पर ही सुरक्षा की व्यवस्था करनी पड़ती है। इतना ही नहीं दुकानों में लगी सीसीटीवी भी हमारी ही होती है। प्रशासन की ओर से बाजार के बीच कोई भी सीसीटीवी नहीं लगाया गया है। हमें खुद ही अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी होती है। 

पटना के व्यापारी मनोज कुमार बबलू जी ने बताया कि दरभंगा में घटी घटना प्रशासन और समाज के लिए निंदनीय घटना है। सभी व्यापारी की दुकान में सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है, इससे बड़ा दुर्भाग्य नहीं हो सकता है। हम लोग प्रशासन के बाद कई बार जा चुके हैं, लेकिन कुछ दिनों के लिए सुरक्षा के नाम पर गश्त तो लगती है, फिर धीरे-धीरे व्यवस्था में चली जाती है। 

पाटलिपुत्र सर्राफा संघ के सदस्य विनोद कुमार ने बताया कि यह एक ऐसी संस्था है जो खुद पर खुद ही मुस्तैदी के साथ अपना कारोबार करती है। अभी तक तो कुछ नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी डर सा माहौल बना हुआ है। हम डर के माहौल में जी रहे हैं। सुशासन के लिए जो होनी चाहिए, वह सरकार नहीं कर रही है।

पाटलिपुत्र सर्राफा संघ के पूर्व सचिव भरत मेहतना ने बताया कि हमें जो अपनी तरफ से करना चाहिए वह करते हैं, लेकिन प्रशासन के प्रशासन की तरफ से बहुत लचर व्यवस्था है। यहां पर सैकड़ों की तादात में दुकानें हैं। कोरोना काल में सभी दुकानें बंद थी और हमें काफी नुकसान हुआ है।  दरभंगा की घटना के बाद हम लोग में डर सा माहौल बैठ गया है।  सर्राफा व्यापारी रवि ने बताया कि शहरी क्षेत्र थोड़ा महफूज भी है, लेकिन जो आउटर है वहां पर कोई महफूज नहीं है।

वहीं व्यापारी अजय कुमार ने बताया कि अभी नई सरकार बनी और ऐसे में अगर इस तरह की घटना घटती है तो ऐसे सरकार से फिर क्या उम्मीद की जा सकती है। पुलिस सिर्फ वीआईपी लोगों की व्यवस्था में लगी है, आम आदमी को कौन पूछता है। 

गौरतलब है कि सीएम नीतीश कुमार इस साल चुनाव प्रचाार के दौरान हर सभा में बिहार में बढ़ते अपराध पर अंकुश लगाने की बात कहते नजर आए और आकंड़ों के मुताबिक बिहार को 23वें नबर का राज्य बताया था, लेकिन बेखौफ अपराधियों पर लगाम लगाने की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

पटना से मदन के साथ कुमार गौतम की रिपोर्ट


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