सुशासन के मूल मंत्र को पटना पुलिस ने किया तार-तार ! न फंसाते हैं-न बचाते हैं पर खड़े हो रहे सवाल...

सुशासन के मूल मंत्र को पटना पुलिस ने किया तार-तार ! न फंसाते हैं-न बचाते हैं पर खड़े हो रहे सवाल...

PATNA: बिहार में सुशासन की सरकार है।सत्ता के विरोधी पर यूएपीए एक्ट की मार है तो दूसरी तरफ एके-47 का वीडियो वायरल होने के बाद भी पुलिस लाचार है।जी हां बिहार के मुखिया अपनी हर जनसभा में यह कहते नहीं थकते कि बिहार की सरकार न किसी को फंसाती है और न बचाती है,कानून अपना काम करती है।बेशक कानून को निष्पक्ष भाव से काम करना भी चाहिए।लेकिन हाल के दिनों में पटना पुलिस की जो कार्यशैली रही है उससे यह सवाल उठ रहा कि क्या बिहार पुलिस सुशासन के मूल मंत्र को लेकर वाकई में संवेदनशील है? 

अब देखिए मोकामा के बाहुबली विधायक प्रकरण में पटना पुलिस ने जिस तरह की जल्दीबाजी दिखाई..किस तरह से उनके घर में एके-47 होने की सूचना पर आधी रात को 22 थानों की पुलिस ने उनके घर को घेर लिया।एसपी से लेकर एएसपी,डीएसपी की संयुक्त टीम ने विधायक के घर पर रेड डाला. उसके बाद पुलिस ने अनंत सिंह के घर से एके-47 बरामद और दो हैंड ग्रेनेड बरामद किया। जाहिर सी बात है उस मामले में विधायक पर केस दर्ज किया गया।लेकिन इतना हीं नहीं बगैर जांच किए आनन-फानन में अनंत सिंह को यूएपीए एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।अमूमन यह एक्ट देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने वाले आतंवादियों,अपराधियों पर प्रयोग होता है।खैर पुलिस को अधिकार है कि किस एक्ट में केस दर्ज किया जाए।पुलिस की इस कार्रवाई को अनंत सिंह उनकी पत्नी ने खुलेआम पुलिस पर फंसाने का आरोप लगाया है।अनंत सिंह ने जेल जाने से पहले कहा था कि मेरे घर में एके-47 मेरे दुश्मन ने रखवाया है।जिसमें विवेका पहलवान-लिपि सिंह-ललन सिंह और नीरज कुमार की साजिश है।चलिए भला कौन नहीं जानता कि अनंत सिंह के दामन पर 55 संगीन जुर्म के दाग हैं।उनका चरित्र क्या है यह सर्वविदित है।लेकिन  इन सबों के बीच आखिर पुलिस की कार्यसैली पर सवाल क्यों उठ रहा है।पुलिस जिस हड़बड़ी में काम कर रही है उससे गड़बड़ी भी साफ दिख जा रही है।

अब गड़बड़ी का पहला उदाहरण देखिए

हद तो तब हो गई जब बाहुबली विधायक अनंत सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए बाढ़ की एएसपी लिपि सिंह जेडीयू विधान पार्षद की गाड़ी जिस पर राज्यसभा सांसद का स्टीकर लगा था उससे साकेत कोर्ट चली गईं।मीडिया में खबर आने के बाद पूरे महकमे ने चुप्पी साध ली।हां जब विरोधियों ने सवाल दागने शुरू कर दिए तो जेडीयू ने पुलिस नियम की व्याख्या कर दी और कह दिया कि पुलिस मैनुअल में किसी नेता की गाड़ी उपयोग करने की मनाही नहीं है। हालांकि इस मामले में डीजीपी से लेकर लेकर अन्य अधिकारियों ने अपने मुंह पर ताला लगा लिया है ।यह ताला किसने लगाया यह जांच का विषय है।खैर अनंत सिंह ने सरेंडर किया और पकड़ने में फेल पुलिस अपना पीठ ठोककर उन्हें बेउर जेल में लाकर बंद करवा दिया।लेकिन सरेंडर से तीन-चार दिन बाद हीं अनंत सिंह के कट्टर दुश्मन विवेका पहलवान का भतीजा और करीबियों का एके-47 लिए हुए वीडियो वायरल हो गया।अब तो समझिए की वर्दीधारियों को सांप सुंघ गया।कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं ।पता नहीं अब कितने थानों की पुलिस ने विवेका पहलवान के ठिकानों पर छापेमारी की है नहीं....बस देखते जाईए...

विवेका पहलवान ने वीडियो को सही बताया पर एके-47 को बता दिया खिलौना

अब इस वाक्ये को भी समझिए। गुरूवार को अनंत सिंह के जानी दुश्मन विवेका पहलवान के घर में एक युवक दो-दो एके-47 लहराता हुआ दिखा।इस बात की पुष्टि हो गई कि वह वीडियो विवेका पहलवान के घर का हीं है।वीडियो में विवेका पहलवान का भतीजा भी दिख रहा था।खबर मीडिया में आने के बाद बवाल मच गया।पूरे प्रकरण में एक बार फिर से पटना पुलिस ने चुप्पी साध ली। तेजतर्रार एएसपी लिपि सिंह और ग्रामीण एसपी कांतेश मिश्रा जो सिर्फ सूचना मिलते हीं अनंत सिंह के घर छापेमारी करने पहुंच गए थे।अब विवेका पहलवान के घऱ में दो-दो एके-47 लहराते वीडियो वायरल होने के बाद सिर्फ जांच का आश्वासन दे रहे हैं।

क्या विवेका पहलवान की बात पर पटना पुलिस ने कर लिया विश्वास?

उधर विवेका पहलवान ने कहा कि जो एके-47 दिख रहा है वह असली नहीं है बल्कि खिलौना है।लेकिन बड़ा सवाल यही है कि अनंत सिंह मामले में कार्रवाई कर सुर्खियां बटोरने वाले पुलिस अधिकारी अब विवेका पहलवान मामले में तेजी क्यों नहीं दिखा रहे।क्या विवेका पहलवान की बात पर पटना पुलिस ने आंख मूंदकर विश्वास कर लिया? 

पटना पुलिस के अधिकारियों की कार्यशैली को देखकर तो यही लग रहा है कि नीतीश कुमार के सुशासन के मुल मंत्र को पटना पुलिस के अधिकारियों ने तार-तार कर दिया है।

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