SDC को ADTO का चार्जः पटना के डीटीओ-MVI नप गए-बीच वाले 'ADTO' बच निकले, बनाये गए हैं मुजफ्फरपुर DTO, जांच की थी बड़ी जिम्मेदारी

SDC को ADTO का चार्जः पटना के डीटीओ-MVI नप गए-बीच वाले 'ADTO' बच निकले, बनाये गए हैं मुजफ्फरपुर DTO, जांच की थी बड़ी जिम्मेदारी

PATNA: बालू के अवैध खनन में बड़े-बड़े अधिकारियों के शामिल होने की पोल खुल गई है। सीएम नीतीश के सख्त फऱमान के बाद इस आरोप में अब तक दो जिलों के एसपी, चार एसडीपीओ, एक एसडीओ समेत 41 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। पटना की बाते करें तो पालीगंज के एसडीपीओ,डीटीओ व दो एमवीआई पर कार्रवाई की गई है। पटना जिले में परिवहन विभाग ने अब तक डीटीओ के अलावे एडीटीओ की तैनाती कर रखी थी। सबकी जिम्मेदारी बालू के अवैध परिवहन पर रोक लगाने की थी। सरकार की कार्रवाई में डीटीओ और एमवीआई तो नप गये लेकिन बीच के एडीटीओ निकल गये। परिवहन विभाग ने 12 जुलाई को पटना के एडीटीओ को मजुफ्फऱपुर डीटीओ बना दिया । स्थानांतरण के बाद एडीटीओ ने 14 जुलाई को मुजफ्फरपुर जाकर ज्वाइन कर लिये . वहीं दूसरी तरफ उसी दिन पटना के डीटीओ और दो एमवीआई पर सरकार ने कार्रवाई कर दी। जानकार बताते हैं कि अवैध बालू की ढुलाई रोकने में एमवीआई के साथ-साथ एडीटीओ की भी जिम्मेदारी थी। ऐसे में दो एमवीआई पर तो कार्रवाई हुई लेकिन एडीटीओ साफ बच निकले। इधऱ, एडीटीओ का पद खाली रहने से पटना डीएम ने वरीय उप समाहर्ता को एडीटीओ का चार्ज दे दिया है।

पटना डीएम ने जारी किया आदेश 

पटना डीएम ने वरीय उप समाहर्ता प्रवीण कुंदन को एडीटीओ का चार्ज दिया है। डीएम के आदेश में कहा गया है कि परिवहन विभाग ने 12 जुलाई को पटना के एडीटीओ लाल ज्योतिनाथ शाहदेव का स्थानांतरण किया है। प्रवीण कुंदन अपने कामों के अतिरिक्त अपर जिला परिवहन पदाधिकारी का काम देखेंगे।  

डीटीओ-एमवीआई के बीच वाले अधिकारी (ADTO) बच निकले 

पटना जिले की बात करें तो बालू खनन में संलिप्तता के आरोप में डीटीओ और दो एमवीआई पर कार्रवाई की गई है। हालांकि इस कार्रवाई में एडीटीओ बच गये। पटना में डीटीओ,एडीटीओ,तीन एमवीआई और चलंत दस्ता के रूप में 5 परिवहन दारोगा तैनात हैं। आर्थिक अपराध इकाई की जांच के आधार पर डीटीओ पुरूषोत्तम, एमवीआई विवेक कुमार और पटना से गया में पदस्थापित किये गये मृत्युंजय कुमार सिंह को हटाया गया। हालांकि कम ही लोग जानते थे कि पटना जिले में एडीटीओ की भी तैनाती थी। विभागीय सूत्रों ने बताया कि पटना के एडीटीओ लाल ज्योतिनाथ शाहदेव भी महत्वपूर्ण जिम्मा संभाल रहे थे। उन पर भी बालू की अवैध ढुलाई करने वाले वाहनों पर नजर रखने की जिम्मेदारी थी। बालू के अवैध खनन में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की गुंज सुनाई देने से पहले ही पटना के एडीटीओ लाल ज्योतिनाथ शाहदेव को मुजफ्फरपुर का डीटीओ बना दिया गया। गृह विभाग ने 9 जुलाई को बालू खनन में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर पत्र भेजा। इधर  परिवहन विभाग ने 12 जुलाई को पटना एडीटीओ को मुजफ्फरपुर डीटीओ के पद पर पदस्थापन के संबंध में आदेश जारी कर दिया। जैसे ही कार्रवाई की भनक लगी पटना के एडीटीओ ने आनन-फानन में 14 जुलाई को मुजफ्फरपुर डीटीओ का कार्यभार संभाल लिया. 

ये भी पढ़ें---अफसरों-माफियाओं ने बालू से 'मलाई' निकाल मिल-बांट कर खाया, 'ब्रॉडसन' कंपनी ने बालू का ढेर ही कर दिया गायब, पुलिसिया जांच की गाड़ी रूकी

परिवहन विभाग में निगरानी की जिम्मेदारी तय  

अब यह चर्चा तेज है कि जब डीटीओ-एमवीआई पर कार्रवाई हुई तो बीच वाले अधिकारी यानी एडीटीओ कैसे बचे गये? क्या सिर्फ पटना में एडीटीओ के पद पर अधिकारी की पदस्थापना की वजह से आर्थिक अपराध इकाई की जांच वहां तक नहीं पहुंची? हालांकि अधिकारियों की मानें तो आने वाले दिनों में  परिवहन विभाग के कुछ और कर्मी और अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है। उच्च स्तर पर इसकी समीक्षा हो रही है। अगर जांच की गाड़ी आगे बढ़ी तो पटना के तत्कालीन एडीटीओ और बिहटा-बिक्रम पालीगंज इलाके का जिम्मा संभाल रहे परिवहन दारोगा भी लपेटे में आ सकते हैं. अब देखना है कि जांच-कार्रवाई की गाड़ी आगे बढ़ती है या चैप्टर क्लोज होगा। 


Find Us on Facebook

Trending News