पटना के लाल राष्ट्रपति चुनाव में करेंगे सियासी कमाल, अटल सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले यशवंत सिन्हा भाजपा के खिलाफ ठोकेंगे ताल

पटना के लाल राष्ट्रपति चुनाव में करेंगे सियासी कमाल, अटल सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले यशवंत सिन्हा भाजपा के खिलाफ ठोकेंगे ताल

पटना. यशवंत सिन्हा  को विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया है. मंगलवार को उनके नाम की घोषणा की है. संयोग से वे राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को चुनौती देंगे. यशवंत सिन्हा उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने पहली बार 1996 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई थी. साथ ही बिहार और झारखंड में भाजपा की जड़ों को मजबूत करने वाले कुछ प्रभावशाली नेता में यशवंत सिन्हा शामिल रहे. लेकिन समय के पहिये ने अब ऐसी करवट ली कि भाजपा को सशक्त बनाने वाले यशवंत सिन्हा ही अब राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को चुनौती देंगे. 

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के नेता यशवंत सिन्हा ने मंगलवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि अब वह वृहद विपक्षी एकता के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए काम करेंगे. कई दिनों से ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूर्व केंद्रीय मंत्री सिन्हा का नाम आगामी राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के रूप में पेश करेंगी. 

सिन्हा ने ट्वीट किया, ‘‘ ममता जी ने जो सम्मान मुझे तृणमूल कांग्रेस में दिया, मैं उसके लिए उनका आभारी हूं। अब समय आ गया है जब वृहद विपक्षी एकता के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए मुझे पार्टी से अलग होना होगा। मुझे यकीन है कि वह (ममता) इसकी अनुमति देंगी।’’


बिहार के पटना में जन्मे और शिक्षित हुए सिन्हा ने 1958 में राजनीति शास्त्र में अपनी मास्टर्स (स्नातकोत्तर) डिग्री प्राप्त की. इसके उपरांत उन्होंने पटना विश्वविद्यालय में 1960 तक इसी विषय की शिक्षा दी. करीब तीन दशक तक भाजपा से जुड़े रहने के बाद पार्टी छोड़ दी. यशवंत और पीएम मोदी के बीच दूरियां भी काफी बढ़ गई. उन्होंने यह कहते हुए भाजपा के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया कि वे 2009 के आम चुनावों में हार के पश्चात् पार्टी द्वारा की गई कार्रवाई से असंतुष्ट थे.

यशवंत सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति से जुड़ गए. 1986 में उनको पार्टी का अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया गया और 1988 में उन्हें राज्य सभा का सदस्य चुना गया. 1990-91 में वे चंद्रशेखर सरकार में वित्तमंत्री रहे. 

जून 1996 में वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। मार्च 1998 में अटल सरकार में उनको वित्त मंत्री और विदेश मंत्री नियुक्त किया गया. 22 मई 2004 तक संसदीय चुनावों के बाद नई सरकार के गठन तक वे विदेश मंत्री रहे. मोदी सरकार को घेरने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा मार्च 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए. अब वे राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार से दो दो हाथ करते दिखेंगे. 


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