बिहार में बालू खनन की मिली अनुमति, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य सरकार को बड़ी राहत

बिहार में बालू खनन की मिली अनुमति, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य सरकार को बड़ी राहत

PATNA: बिहार में बालू खनन पर लगी रोक हटा ली गयी है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बालू खनन पर रोक से राज्य को राजस्व का नुकसान हो रहा है. बता दें, बालू खनन को लेकर राज्य सरकार ने जो फैसला किया था, उसको एनजीटी ने अपने गाइडलाइन के खिलाफ माना था और इसी वजह से बालू खनन के आदेश पर रोक लगा दी गयी थी. इससे बिहार सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा था. इसके खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी जहां से बड़ी राहत मिली है। 

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस रोक से सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है. अदालत ने कहा कि बालू खनन के मुद्दे से निपटते समय पर्यावरण के सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ विकास के संतुलित तरीकों को लागू करना जरूरी है। जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाले तीन जजों की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि बिहार के सभी जिलों में खनन के लिए जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने की कवायद नए सिरे से की जाएगी। बेंच ने कहा, 'इस बात की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि जब वैध खनन पर रोक है तब अवैध खनन कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रहा है और नतीजतन रेत माफिया के बीच संघर्ष, अपराधीकरण और कई बार लोगों की जान जाने जैसे मामले सामने आते रहते हैं।'

16 जिलों में बंदोबस्ती का प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल ने 1 अक्टूबर को मंजूर किया था. 8 जिलों में 50 फ़ीसदी अतिरिक्त शुल्क के साथ बंदोबस्ती होनी थी,अब कोर्ट का फैसला आने के बाद अब इस पर आगे बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. बिहार सरकार के फैसले पर ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आपत्ति जताते हुए राज्य में बालू घाटों की निविदा प्रक्रिया को रोक दिया था. बालू खनन के लिए टेंडर की प्रक्रिया 8 जिलों में चल रही थी, लेकिन ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद सरकार ने अंतिम रोक लगा दी थी. 

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