आतंकियों और देशद्रोहियों का लंबे अरसे से सुरक्षित पनाहगाह रहा है पटना का फुलवारी शरीफ, कई कुख्यात हो चुके हैं गिरफ्तार

आतंकियों और देशद्रोहियों का लंबे अरसे से सुरक्षित पनाहगाह रहा है पटना का फुलवारी शरीफ, कई कुख्यात हो चुके हैं गिरफ्तार

पटना. गजवा-ए-हिंद और भारत को वर्ष 2047 तक इस्लामिक राष्ट्र बनाने का खतरनाक मंसूबा पाले देशद्रोहियों को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर बड़ी साजिश का भंडाफोड़ किया है. लेकिन पटना के जिस फुलवारी शरीफ मोहल्ले से यह साजिश रची जा रही थी वह इलाका आज से बल्कि लम्बे अरसे से आतंकियों और देशद्रोहियों का सुरक्षित पनाहगाह रहा है. फुलवारीशरीफ अतीत में भी देशद्रोहियों का एक सुरक्षित ठिकाना रहा है. 

1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और दानापुर छावनी सैन्य खुफिया विंग ने पटना के दक्षिण-पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित फुलवारीशरीफ को राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में वर्णित किया था. सबसे पहले फुलवारीशरीफ वर्ष 1997 में ‘गलत’ कारणों से तब सुर्खियां बना था जब दानापुर सैन्य खुफिया विंग को फुलवारीशरीफ कई पाकिस्तान-प्रशिक्षित आतंकवादियों के इलाके में शरण लेने की सूचना मिली थी. 1993 में 18 महीने की जेल की सजा काटने वाले एक आतंकी सहित कश्मीर में आतंकवादी इतिहास वाले सात लोगों के 1997 में लगभग छह महीने तक फुलवारीशरीफ में रहने की सूचना खुफिया एजेंसियों को मिली थी. 

इसी तरह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लल्लू खान और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद में अगस्त 2000 में पुलिस को यह पता चला कि वे फुलवारीशरीफ में नकली भारतीय पासपोर्ट बनाने और बेचने में शामिल थे. दिल्ली पुलिस ने जनवरी 2001 में फुलवारीशरीफ से फर्जी पासपोर्ट बनाने और रोजगार रैकेट चलाने वाले एक गिरोह का भी भंडाफोड़ किया था. गिरोह का नेतृत्व मोहम्मद शमीम कर रहा था. केंद्रीय खुफिया सूत्रों ने तब बताया था कि छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके घर से कुल मिलाकर 23 भारतीय पासपोर्ट जब्त किए.

2001 में, अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के एक कथित एजेंट मोहम्मद अरशद उर्फ लड्डू मियां को दिल्ली पुलिस ने फुलवारीशरीफ से गिरफ्तार किया था. इसी तरह  दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2005 में वाराणसी के पास जौनपुर स्टेशन पर नई दिल्ली-पटना जाने वाली श्रमजीवी एक्सप्रेस में कुकर बम सीरियल विस्फोटों के सिलसिले में भी फुलवारीशरीफ में छापेमारी की थी. 1990 के दशक के अंत में फुलवारीशरीफ ने नकली नोटों के लेन-देन के लिए कुख्यात था. इसके अतिरिक्त, दिल्ली पुलिस ने शमीम सरवर उर्फ पीर बाबा को फुलवारीशरीफ से 2001 में नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास को उड़ाने की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

बाद के वर्षों में भी कई बार फुलवारीशरीफ गलत कारणों से सुर्खियां बटोरते रहा. लेकिन इस बार 11 जुलाई को यहां से अतहर परवेज और जलालुद्दीन की गिरफ्तारी ने जो चौंकाने वाले राज खोले हैं वह और ज्यादा खतरनाक हैं. पुलिस के अनुसार पीएफआई से जुड़े ये लोग भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिश रच रहे थे. वहीं इलियास ताहिर ने व्हाट्सअप ग्रुप गजवा-ए-हिंद के नाम से 181 लोगों को जोड़कर भारत विरोधी विचारधारा का प्रसार किया. इन सबके तार भी फुलवारीशरीफ से जुड़े हैं. 


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