पिता ने चलाई 105 किमी साइकिल, बेटे को दिलानी थी परीक्षा

पिता ने चलाई 105 किमी साइकिल, बेटे को दिलानी थी परीक्षा

Desk: कोरोना जैसी महामारी को लेकर जहां पिछले कई दिनों से बसें बंद होने के कारण आम लोग परेशान हैं. तो वहीं, सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्रों को उठानी पड़ रही है जिनकी परीक्षा में पूरक आई है. ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के धार जिले में देखने को मिला. यहां एक पिता अपने बेटे को परीक्षा दिलाने के लिए 105 किलोमीटर दूर साइकिल पर बैठाकर परीक्षा केन्द्र पहुंचा.

दरअसल,  ऐसे बच्चे जो 10वीं और 12वीं की परीक्षा में पास नहीं हो पाए हैं. ऐसे बच्चों का हौंसला बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 'रुक जाना नहीं' अभियान चलाया है. इस अभियान के तहत परीक्षाओं में फेल हुए बच्चों को एक बार फिर से पास होने का मौका दिया गया है. जिसको लेकर फेल हुए बच्चों की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं.

वहीं, ग्राम बयडीपुरा के रहने वाले शोभाराम के बेटे आशीष की कक्षा 10 में पूरक आ गई थी और पूरक परीक्षा का सेंटर पूरे जिले में केवल धार ही बनाया गया है. कोरोना संक्रमण के चलते बसें अभी चालू नहीं हुई हैं जिसके चलते उनको धार पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा था और न ही गरीबी में वह किसी तरह के साधन का प्रबंध कर सकते थे. पढ़ाई की अहमियत को समझते हुए गरीब और अनपढ़ 38 वर्षीय पिता अपने बच्चे के साथ धार पहुंचने के लिए साइकिल से निकल पड़ा. दोनों पिता-पुत्र साइकिल पर अपने साथ दो दिन के खाने-पीने का सामान भी ले आए. रात्रि विश्राम उन्होंने मनावर में किया और अगले दिन ये सुबह धार पहुंच गए.

धार में आशीष ने भोज कन्या विद्यालय में परीक्षा दी. आशीष के पिता शोभाराम का कहना है कि पैसे और कोई साधन  नहीं होने के कारण इसे साइकिल से ही परीक्षा दिलवाने ले आया हूं. मेरे पास मोटर साइकिल नहीं है और कोई मदद नहीं करता. मैं चाहता हूं मेरा बच्चा कुछ पढ़ लिख जाए इसलिए मैं चला आया. मेरे बच्चे की परीक्षा 24 अगस्त तक है.

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