बिहार में तैयार एविएशन टरबाइन फ्यूल से उड़ान भड़ेंगे प्लेन, प्रदेश के तीनों एयरपोर्ट पर सप्लाई की तैयारी शुरू, जानें यात्रियों को कैसे होगा फायदा

बिहार में तैयार एविएशन टरबाइन फ्यूल से उड़ान भड़ेंगे प्लेन, प्रदेश के तीनों एयरपोर्ट पर सप्लाई की तैयारी शुरू, जानें यात्रियों को कैसे होगा फायदा

PATNA : बिहार में गाड़ियों में इस्तेमाल होनेवाले एथेनॉल के देश के पहले प्लांट शुरू होने के बाद अब बड़े उड़ान भरने की तैयारी शुरू हो गई है। अब बिहार में तैयार फ्यूल का प्रयोग विमानों में किया जाएगा। जिसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। बताया गया कि बिहार के तीनों एयरपोर्ट पर उतरनेवाले विमानों में इस फ्यूल की सप्लाई की जाएगी। ऐसे में अगर बिहार से ही एटीएफ की सप्लाई की जाएगी तो इसकी लागत में कमी आएगी, जिससे विमानों के किराए में भी कमी होगी।

बरौनी रिफाइनरी में अगले माह से उत्पादन शुरू

बताया गया कि बरौनी रिफाइनरी में सब कुछ ठीक-ठाक रहा, तो अगले माह से विश्वस्तरीय एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) यानी हवाई ईंधन का उत्पादन शुरू हो जायेगा. कमीशनिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है. इस बीच उत्पादित एटीएफ को माइक्रो टेस्टिंग के लिए ब्रिटेन की सबसे प्रमुख लैब कंपनी को भेजा गया है. उसकी रिपोर्ट आने के बाद एटीएफ का उत्पादन शुरू हो जायेगा.


पांच साल से चल रही थी तैयारी 

इंडजेट इकाई एटीएफ का उत्पादन करेगी, जो सूबे के पटना, दरभंगा और गया एयरपोर्ट की ईंधन जरूरत को पूरा करेगी। साथ ही पड़ोसी देश नेपाल में एटीएफ की मांग को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट पर पांच सालों से काम चल रहा है। इसे लेकर पिछले दिनों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के चेयरमैन एसएम वैद्य ने बरौनी रिफाइनरी के दौरे के दौरान समीक्षा की थी। फिलवक्त पटना, दरभंगा और गया एयरपोर्ट को हर दिन लगभग 100 केएल एटीएफ की सप्लाइ की जाती है।

मेक इन इंडिया के तहत हुआ विकसित

 इंडियन ऑयल के वरीय अधिकारियों के अनुसार एटीएफ के उत्पादन के लिए कंपनी के आरएंडडी डिवीजन द्वारा विकसित मेक इन इंडिया तकनीक का उपयोग करने वाली पहली इकाई है.

उत्पादन को लेकर मिला सभी एनओसी

मिली जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पैसो) से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल चुका है. लगभग 250 केटीपीए क्षमता वाली इस यूनिट से टेस्टिंग रिपोर्ट आने के बाद उत्पादन प्रक्रिया शुरू हो जायेगी. उद्घाटन कब होगा, इसे बताना मुश्किल है, लेकिन उम्मीद है कि 15 अगस्त से उत्पादन शुरू हो सकता है. इसका निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय के स्तर पर होगा.

32 साल बाद ईंधन पाइपलाइन से पहुंचा बरौनी रिफाइनरी

वहीं, दूसरी ओर 32 साल बाद पाइपलाइन से मोरीगांव और हल्दिया (पश्चिम बंगाल) से बरौनी रिफाइनरी में एटीएफ पहुंचने का काम गुरुवार से शुरू हो गया है. इसके लिए मोरीगांव और हल्दिया से बरौनी रिफाइनरी तक अंडरग्राउंड पाइप बिछाया गया है. बरौनी रिफाइनरी में ईंधन को स्टॉक किया जायेगा. इसके बाद टैंकर के माध्यम से पटना, दरभंगा और गया एयरपोर्ट को सप्लाइ किया जायेगा। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के कार्यकारी निदेशक (बिहार -झारखंड) विभाष कुमार ने बताया कि कंपनी के लिए यह ऐतिहासिक दिन है। इससे लॉजिस्टिक खर्च तो बचेगा. साथ ही पर्यावरण प्रदूषण कम होगा। फिलवक्त पटना, दरभंगा और गया एयरपोर्ट को हर दिन लगभग 100 केएल एटीएफ की सप्लाइ की जाती है।

कितने तरह का होता है एटीएफ
एटीएफ एक विशेष प्रकार का पेट्रोलियम आधारित ईंधन है। कच्चे तेल के शोधन में यह डीज़ल और केरोसीन के साथ वर्गीकृत है। जेट ईंधन वास्तव में केरोसीन की एक उच्च परिष्कृत श्रेणी है। जेट ए-1 और जेट ए टर्बाइन सिविल कॉमर्शियल एविएशन में इस्तेमाल होने वाली ईंधन की दो मुख्य श्रेणियां हैं। अन्य विमानन ईंधनों में मिलिट्री जेट ईंधनों जिसमें प्रमुख रूप से जेपी-4, जेपी-5, और जेपी-8, शामिल हैं तथा ये सभी केरोसीन प्रकार के ईंधन हैं। 

45 फीसदी होता है खर्च

 एटीएफ का सस्ता होना एविएशन इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत की बात होती है। अगर एटीएफ की दरों में कमी का सिलसिला बना रहा तो कई एयरलाइंस पैसेंजर किराए में भी कमी करने का ऐलान कर सकती हैं। क्‍योंकि एविएशन सेक्टर में एयरलाइंस का 40 से 45 फीसदी खर्च एटीएफ की खरीद पर ही होता है।

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