पीएम ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का किया शुभारंभ, जानिये कैसे मिलेगा इसका लाभ

पीएम ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का किया शुभारंभ, जानिये कैसे मिलेगा इसका लाभ

दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का शुभारंभ किया. इसके तहत सभी नागरिकों को एक विशिष्ट डिजिटल हेल्थ आइडी मुहैया कराई जाएगी, जिसमें उसकी सेहत से जुड़ी सभी सूचनाएं दर्ज होंगी. बता दें कि पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से डिजिटल हेल्थ मिशन के पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की थी.

आयुष्यमान भारत डिडिटल हेल्थ मिशन के तहत देश के सभी नागरिकों का एक हेल्थ आईडी बनेगा, जो उनके हेल्थ खाते के रूप में भी काम करेगी. इससे व्यक्तिगत स्वास्थ रिकार्ड को मोबाइल ऐप की मदद से जोड़ा और देखा जा सकेगा. इसके तहत हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री और हेल्थकेयर फैसिलिटीज रजिस्ट्रियां, आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों दोनों ही मामलों में सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए एक कलेक्शन के रूप में कार्य करेंगी. यह चिकित्‍सकों, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए व्यवसाय में भी आसानी को सुनिश्चित करेगा.

ये होगा फायदा

यूनिक हेल्थ कार्ड बन जाने के बाद मरीज को डॉक्टर से दिखाने के लिए फाइल ले जाने से छुटकार मिलेगा. डॉक्टर या अस्पताल रोगी का यूनिक हेल्थ आईडी देखकर उसका पूरा डेटा निकालेंगे और सभी बातें जान सकेंगे. उसी आधार पर आगे का इलाज शुरू हो सकेगा. साथ ही पूरी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल फार्मेट में अपडेट होगी. किसी दूसरे शहर, अस्पताल में भी यूनीक आईडी से डॉक्यूमेंट्स देख सकेंगे. इससे डॉक्टर्स को इलाज करने में आसानी होगी. यह कार्ड ये भी बताएगा कि उस व्यक्ति को किन-किन सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है. रोगी को आयुष्मान भारत के तहत इलाज की सुविधाओं का लाभ मिलता है या नहीं, इस यूनिक कार्ड के जरिये पता चल सकेगा.

हेल्थ आईडी में ये होंगी दर्ज

कार्ड में मेडिकल रिकार्ड से जुड़ी सभी जानकारियां दर्ज होगी. यहां तक कि पिछली बार किस दवा का आप पर क्या असर हुआ था, वह भी पता चल जाएगा. दवा बदली गई तो क्यों? इससे इलाज के दौरान डॉक्टर को केस समझने में मदद मिलेगी. हेल्थ आईडी के लिए सबसे पहले तो जिस व्यक्ति की आईडी बनेगी, उससे मोबाइल नंबर और आधार नंबर लिया जाएगा. इन दो रिकॉर्ड की मदद से यूनिक हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा. इसके लिए सरकार एक हेल्थ अथॉरिटी बनाएगी, जो व्यक्ति का एक-एक डेटा जुटाएगी. जिस व्यक्ति की हेल्थ आईडी बननी है, उसके हेल्थ रिकॉर्ड जुटाने के लिए हेल्थ अथॉरिटी की तरफ से इजाजत दी जाएगी. इसी आधार पर आगे का काम बढ़ाया जाएगा.

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