मोदी को आयी अयोध्या की याद ! 1 मई को कर सकते हैं रामनगरी में रैली, बतौर PM 5 साल में पहला दौरा

मोदी को आयी अयोध्या की याद ! 1 मई को कर सकते हैं रामनगरी में रैली, बतौर PM 5 साल में पहला दौरा

News4Nation : साधु संत से लेकर हिन्दू संगठनों ने पिछले पांच सालों के न जाने कितनी दफा प्रधानमंत्री से अयोध्या जाने की मांग की है। लेकिन मोदी अयोध्या नहीं गए लेकिन मोदी अब अयोध्या जाएंगे। जी हां वह भी चुनावी रैली करने जैसा कि सूत्र बता रहे हैं। अयोध्या में 6 मई को मतदान होना है।

लोकसभा संग्राम का आधा काम तमाम हो चुका है. यानी संसद की आधी सीटों पर चुनाव खत्म हो चुका है इसी बीच यह खबर आ रही है कि प्रधानमंत्री मोदी उत्तरप्रदेश के बाकी बचे सीटों को साधने के लिये अयोधया में 1 मई को रैली में भाग लेंगेे।

 गौरतलब है कि चुनाव को देखते हुए भाजपा व अन्य हिन्दू संगठनों की तरफ से राम मंदिर की चर्चा को हवा दिया जा रहा है। चुकी मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो पीएम भी सैवैधानिक तरीके से मन्दिर बनाने की बात कह रहे हैं वही दूसरी तरफ साधु संतों व हिंदूवादी संगठनों के द्वारा रामन्दिर को लेकर सरकार के रवैये पर लगातार सवाल उठाया जाता रहा है। इसी को लेकर साधुओं ने कई बार प्रधानमंत्री से अयोध्या जाने की मांग भी की है ।

पिछले पांच साल में कई बार ऐसा मौका आया है जब साधु-संतों ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार जरूर अयोध्या आना चाहिए. लेकिन पांच साल बाद अब ये मौका आया है जब नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री पहली बार राम की नगरी अयोध्या में होंगे. अयोध्या में 6 मई को मतदान होना है.

2017 में जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार आई तो राम भक्तों में उम्मीद जगी थी, कि अब जब केंद्र-राज्य दोनों में पूर्ण बहुमत की सरकार है तो मंदिर मसले का हल जरूर निकलेगा. लेकिन, मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण सरकार इसपर कुछ नहीं कर सकी.

हालांकि, योगी सरकार ने अयोध्या को पिछले दो साल में महत्व दिया है. योगी अयोध्या में भव्य तरीके से दिवाली मनाते रहे हैं, इस बार तो साउथ कोरिया की प्रथम महिला भी दिवाली के अवसर पर अयोध्या में थीं. इसके अलावा यूपी सरकार ने अयोध्या के लिए बड़ा बजट जारी किया है, भगवान राम की मूर्ति लगाने का वादा किया है.

सुप्रीम कोर्ट में ये मामला पिछले कई दशकों से अटका हुआ है. लगातार सुनवाई पर सुनवाई जारी हैं, अब कुछ समय पहले ही अदालत ने इस मसले को दोबारा मध्यस्थता के लिए छोड़ दिया था. इसके तहत कुछ प्रतिनिधियों को तय किया गया है जिनपर सभी पक्षों से बात करने की जिम्मेदारी है, हालांकि अगर मामला नहीं सुलझता है तो सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम फैसला देगा.



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