पटना का भूमाफिया सत्यनारायण जेल से बाहर आते ही फिर हुआ गिरफ्तार, बेटा सुनील सिंह है फरार

पटना का भूमाफिया सत्यनारायण जेल से बाहर आते ही फिर हुआ गिरफ्तार, बेटा सुनील सिंह है फरार

पटना। एक दर्जन से अधिक संगीन मामलों में आरोपित रह चुके सत्यनारायण सिंह (एकौना कोठी, केसरीनगर) को राजीवनगर थाने की पुलिस ने सोमवार की रात गिरफ्तार कर लिया। भोजपुर जिले के रहने वाले 75 साल के सत्यनारायण को नेपाली नगर इलाके से पुलिस ने उस वक्त पकड़ा, जब वह एक विवादित जमीन पर जबरन काम करवा रहे थे। उसकी शिकायत एक महिला ने पुलिस से की थी।

कुर्सी पर कटी पूरी रात

गिरफ्तारी के बाद थाने लाए गए सत्यनारायण सिंह की पूरी रात कुर्सी पर कटी। उम्र का ख्याल करते हुए पुलिस ने उसे थाने की हाजत में बंद करना मुनासिब नहीं समझा। इस दौरान परिजन उन्हे छोड़ देने की गुहार लगाते रहे। लेकिन राजीवनगर थानेदार ने किसी की नहीं सुनी।

हत्या के मामले में आपको गिरफ्तार किया जाता है

जिस वक्त सत्यनारायण सिंह को थाने पर लाया गया, उस समय तक उसे पता नहीं था कि पुलिस इस बार उस पर कड़ी कार्रवाई करने वाली है। एकाएक थानेदार निशांत ने उन्हें कहा ‘हत्या के मामले में आपको गिरफ्तार किया जाता है। अब आपको थाने से बाहर जाने की इजाजत नहीं है।

जनवरी में जेल से छूटे थे सत्यनारायण

सत्यनारायण जनवरी में ही जेल से रिहा होकर लौटे थे। बताया गया कि 2001 में डीएसपी के बेटे कृष्ण मोहन सिंह की हत्या करने के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसमें लगभग 11 महीने तक वह जेल में रहे थे। इस चर्चित हत्याकांड में पुलिस ने कई अन्य आरोपितों को भी पकड़ा था। इसके अलावा भी वह अन्य मामलों में जेल चुका है।

बेटा सुनील है करणी सेना का अध्यक्ष

सत्यनारायण सिंह पर जितने मामले दर्ज हैं। लगभग उतने ही मामले उनके बेटे सुनील सिंह पर भी दर्ज है। सुनील सिंह की पहचान करणी सेना के अध्यक्ष के रूप में भी है। जो पिता के हर अपराधों में बराबर का भागीदार रहा है। जहां पिता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, वहीं बेटा सुनील फरार है. जिसकी तलाश के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। गौरतलब है कि हाल ही में जयकांत हत्याकांड मामले में पुलिस ने सत्यनारायण के बेटे शैलेश को जेल भेजा था।

राजीव नगर में किसी निर्माण के लिए लेनी पड़ती थी इजाजत, ऐसा था खौफ

राजीवनगर इलाके में पिछले कई दशकों से सत्यनारायण सिंह के नाम का डंका बजता था। हालत यह थी कि इस इलाके में किसी ने जमीन खरीदी तो मकान की नींव डालने से पहले उसे सत्यनारायण से सहमति लेनी होती थी। इसके बाद ही कोई मकान बनवा सकता था। ऐसा इसलिए ताकि मकान बनाने में कोई अड़चन न आए। अगर किसी ने सत्यनारायण और उसके बेटों को दरकिनार कर अपना काम करवाने की कोशिश की तो उसकी जमीन पर काम रोक दिया जाता था। अधिकारी भी उसे परेशान करते थे। हरवे-हथियार से लैस सत्यनारायण के गुर्गे जमीन पर पहुंच जाया करते थे। उसने बाकायदा एक कोऑपरेटिव बना रखा था। उसकी रसीद भी थी। कोऑपरेटिव के अंतर्गत उसने जमीन के कई टुकड़ों को बेच डाला। आवास बोर्ड की सरकारी जमीन पर सत्यनारायण सिंह बेधड़क काम करवाया करता था।

पुलिस और प्रशासन के बीच गहरी पैठ

पुलिस और प्रशासन में भी सत्यनारायण सिंह की गहरी पैठ रही है। उसने कई बड़े लोगों को भी जमीन दी और उनका संरक्षण प्राप्त किया। यही कारण था कि निचले स्तर पर पुलिस के अफसर चाहकर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाते थे। यही कारण था कि वर्ष 2015 में हुए जयकांत हत्याकांड में वर्षों से सत्यनारायण सिंह फरार था लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं की जाती थी।

भू-माफिया के बेटों पर भी कई मामले दर्ज

भू-माफिया सत्यनारायण सिंह के बेटों पर भी कई मामले दर्ज हैं। बड़े बेटे सुनील सिंह और छोटे बेटे शैलेश पूर्व में भी पकड़े जा चुके हैं। सुनील को कुछ वर्ष पूर्व गोली भी लगी थी। शैलेश का नाम राजधानी के चर्चित अपहरणकांडों में आ चुका है। सत्यनारायण सिंह पर सिर्फ राजीव नगर थाना में ही 35 मामले दर्ज हैं। अब उन सारी फाइलो को खोलने की बात कही जा रही है

इलाके के लोगों को अब तक यकीन नहीं

राजीवनगर इलाके में सत्यनारायण की गिरफ्तारी को लेकर लोगों को यकीन नहीं हुआ। लोगों का मानना था क पुलिस इस भू-माफिया को थाने से ही छोड़ देगी। हालांकि जब सत्यनारायण सिंह को पुलिस थाने से कोर्ट की ओर ले गयी, तब उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई।

ये संगीन मामले दर्ज हैं :

थाना               कांड संख्या

शास्त्रीनगर      553/01, 14/9, 150/10, 303/14, 323/14

पाटलिपुत्र      110/10, 126/10

दीघा             134/15

राजीव नगर    9/14, 203/15, 214/15, 385/15


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