बैंक लूट की घटना को नाकाम करनेवाले पुलिस अधिकारी को नहीं मिला शहीद का दर्जा, पत्नी लगा रही गुहार

बैंक लूट की घटना को नाकाम करनेवाले पुलिस अधिकारी को नहीं मिला शहीद का दर्जा, पत्नी लगा रही गुहार

PATNACITY : पुलिस सेवा में आने से पहले सभी पुलिसकर्मियों को अपने देश के संविधान, राज्य की सेवा और अपने कर्तव्यों के प्रति हमेशा   सत्य निष्ठा से काम करने का शपथ दिलाया जाता है. इस बात का शपथ दिलाया जाता है कि इसके लिए अगर जान भी देनी पड़े तो वे पीछे नही हटेंगे.

हम बात कर रहे है मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा के रहनेवाले सब इंस्पेक्टर संजय तिवारी की, जो छपरा के इशुआपुर थाना में 2014 में थाना प्रभारी के पद पर कार्यरत थे. 22 दिसम्बर 2014 को उन्हें किसी बैंक में लूट होने की सूचना मिली. तत्काल दल बल के साथ वे घटनास्थल पर पहुंचे और देश की सम्पति को लूटने से बचा लिया. इस घटना में वे अपराधियो के गोली के शिकार हो गए. अपराधियों ने उनके शरीर में 12 से अधिक गोलियां दागी थी. जिसके बाद वे हमेशा के लिए नींद की आगोश में सो गए. यानी कर्तव्य की खातिर लड्त्ते हुए शहीद हो गए. कहने के लिए तो वे शहीद हो गए, 

लेकिन आज की सबसे बड़ी बिडम्बना यह है की उनकी मृत्यु के करीब 5 बर्ष हो गए. लेकिन उनको आज तक उन्हें शहीद होने का दर्जा तक प्राप्त नही हुआ. उनकी पत्नी का मायका पटनासिटी के सबलपुर में है. अपने पति की शहादत को याद कर आज भी वे रो पड़ती हैं. पत्नी प्रियंका तिवारी ने कहा कि उन्हें शहीद हुए आज 5 वर्ष होने को आये है, लेकिन आज तक उन्हें शहीद होने को पत्र हमें नही मिला और ना ही आज तक पेंशन की शुरुआत हुई. 

बस किसी तरह नौकरी जरूर मिल गयी. आज अगर उन्हें शहीद दर्ज़ा का पत्र प्राप्त होता तो हमे कई तरह की सुविधा भी मिलती. पत्नी प्रियंका तिवारी के द्वारा इस बारे में कई बार वरीय अधिकारियों को भी पत्र के माध्यम से सूचित किया गया. लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. 

पटनासिटी से रजनीश की रिपोर्ट 

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