जनगणना पर सियासतः बीजेपी के केंद्र और राज्य में दोहरे रवैये पर भड़के तेजस्वी यादव, पार्टी को बताया पिछड़ी जाति का विरोधी

जनगणना पर सियासतः बीजेपी के केंद्र और राज्य में दोहरे रवैये पर भड़के तेजस्वी यादव, पार्टी को बताया पिछड़ी जाति का विरोधी

PATNA: देश में इसी साल जनगणना की जानी प्रस्तावित है। बता दें, हर 10 साल में देश में जनगणना कार्य किया जाता है, जिसके लिए व्यारक रूप से योजनाएं बनाई जाती हैं और सरकारी कर्मचारियों को काम पर लगाया जाता है। इसी बीच बीजेपी के चहेते और केंद्र में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के बयान से बिहार में सियासत तेज हो गई है। बीते दिन नित्यानंद राय ने कहा कि देश में केवल SC/ST की ही जनगणना होगी, अन्य जातियों की नहीं। इसपर बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने कड़े स्वर में कह दिया कि बीजेपी पिछड़ी जाति का विरोध करती है। उन्हें आगे देखना नहीं चाहती।

इस संबंध में में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट के जरिए अपनी राय साझा की है, जहां उन्होनें कड़े ढंग से केंद्र सहित बिहार बीजेपी पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि बिहार के दोनों सदनों में BJP जातीय जनगणना का समर्थन करती है, लेकिन संसद में बिहार के ही कठपुतली मात्र, पिछड़े वर्ग के राज्यमंत्री से जातीय जनगणना नहीं कराने का एलान करवाती है। केंद्र सरकार OBC की जनगणना क्यों नहीं कराना चाहती? BJP को पिछड़े/अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफ़रत क्यों है? वहीं दूसरे ट्वीट में तेजस्वी ने कहा कि जनगणना में जानवरों की गिनती होती है। कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, शेर-सियार, साइकिल-स्कूटर सबकी गिनती होती है। कौन किस धर्म का है, उस धर्म की संख्या कितनी है इसकी गिनती होती है लेकिन उस धर्म में निहित वंचित, उपेक्षित और पिछड़े समूहों की संख्या गिनने में क्या परेशानी है? उनकी गणना के लिए जनगणना किए जाने वाले फ़ॉर्म में महज एक कॉलम जोड़ना है। उसके लिए कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं होना है। अर्थात सरकार पर कोई वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।

पिछड़े वर्गों के हित में तेजस्वी ने कहा कि जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या ज्ञात नहीं होगी तो उनके कल्यानार्थ योजनाएं कैसे बनेगी? उनकी शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बेहतरी कैसे होगी?  उनकी संख्या के अनुपात में बजट कैसे आवंटित होगा? वो कौन लोग है जो नहीं चाहते कि देश के संसाधनों में से सबको बराबर का हिस्सा मिले? जातीय जनगणना के लिए हमारे दल ने लंबी लड़ाई लड़ी है और लड़ते रहेंगे। यह देश के बहुसंख्यक यानि लगभग 65 फ़ीसदी से अधिक वंचित उपेक्षित उपहासित प्रताड़ित वर्गों के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। मोदी सरकार पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती? क्या उन पिछड़े वर्गों के 70-80 करोड़ लोग हिंदू नहीं है?

बता दें, जातीय जनगणना के पक्ष में बिहार के सभी पार्टी के नेता हैं। चाहें वह राजद सुप्रीमो लालू यादव हो, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हो, या तेजस्वी यादव, तीनों ही समान रूप से जातीय जनगणना के पक्षधर हैं औऱ लंबे समय से इसकी मांग करते रहे हैं। हालांकि अब जब केंद्र सराकर द्वारा इस मामले पर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया गया है, तो देखना यह है कि बिहार के अन्य माननीय इसपर क्या रुख अख्तियार करते हैं।

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