गरीबी का मजाक : मजदूर का गिरा मिट्टी का घर, सरकार देगी 10 हज़ार की सहायता

गरीबी का मजाक : मजदूर का गिरा मिट्टी का घर, सरकार देगी 10 हज़ार की सहायता

 MOKAMA : हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहे हैं. इसके बावजूद राजधानी से सटे इलाके में किसी का आशियाना धरासायी हो जाये तो चौथी अर्थव्यवस्था बनने पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता है. ताजा घटना है मोकामा प्रखंड क्षेत्र के कन्हाईपुर   ब्रह्मस्थान में सामने आया है. यहाँ शंभू यादव का मिट्टी से बना घर धराशाई हो गया है. 

घर सोमवार को अचानक रेत की दीवार की तरह भरभरा कर गिर गया. बताया जाता है कि शंभू उस वक्त अपने पत्नी और बच्चे के साथ घर में ही थे. अचानक घर गिरने की आवाज सुनकर घर से बाहर दौड़े और मिट्टी का बना घर धराशाई हो गया. हालांकि इसमें किसी के कोई हताहत की सूचना नहीं है. घर के सभी लोग बाल-बाल बच गए हैं. मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करनेवाले शंभू यादव ने बताया कि उन्हें कोई सरकारी लाभ नहीं मिलता है बीपीएल सूची से भी वंचित रखा गया है.

अब सवाल ये उठता है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के आँखोँ पे कौन सी पट्टी बँधी है जो मिट्टी के घर मे रहने बालों को बी पी एल में भी अब तक शामिल नही किया गया. ये धरातल की सच्चाई है जो सूबे के हर पंचायत में देखने को मिल जाएगी. चूँकि पीड़ित का नाम गरीबी रेखा से नीचे में दर्ज नही है 

अतः उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी शायद ही मिले. इस मामले पर मोकामा के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा है कि इस अवस्था मे सरकारी नियमों के अनुसार नौ हजार आठ सौ रुपये की सहायता राशि तत्काल दी जाएगी.

पटना ग्रामीण से रवि शंकर शर्मा की रिपोर्ट

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