दो किलोमीटर नंगे पांव चलकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

दो किलोमीटर नंगे पांव चलकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

DESK. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भारतीय परंपराओं और जमीन से जुड़ी हुई महिला के रूप में जाना जाता है. गुरुवार को जब द्रौपदी मुर्मू ओडिशा पहुंची तब उन्होंने एक बार फिर से इसे साबित किया. दरअसल, वे पुरी में भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने के लिए करीब दो किलोमीटर नंगे पांव चलकर गईं. इस दौरान मंदिर जाते समय श्रद्धालुओं ने राष्ट्रपति का अभिनंदन भी किया. रास्ते में बड़ी संख्या में बच्चे भी राष्ट्रपति से मिलने खड़े रहे. राष्ट्रपति पूरे रास्ते मुस्कराते हुए लोगों का अभिवादन स्वीकारती रहीं.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ओडिशा राज्य से ही हैं. करीब 25 साल पहले द्रौपदी मुर्मू ने एक पार्षद बनकर अपना राजनीति करियर शुरू किया था. द्रौपदी मुर्मू सबसे पहले 1997 में ओडिशा के रायरंगपुर नगर पंचायत से पार्षद का चुनाव जीती थीं. फिर तीन साल बाद 2000 में वो रायरंगपुर से पहली बार विधायक बनीं. 2002 से 2004 के बीच भाजपा-बीजेडी सरकार में मंत्री बनाई गईं. 18 मई 2015 को द्रौपदी मुर्मू झारखंड की 9वीं राज्यपाल बनीं. देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जुलाई पदभार ग्रहण किया था.

भुवनेश्वर पहुंचने पर ओडिशा के राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनका स्वागत किया. राष्ट्रपति की यह पहली ओडिशा यात्रा है. उन्हें गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया. यहां से राष्ट्रपति भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने के लिए पुरी निकलीं. इस दौरान वे करीब 2 किमी तक बगैर चप्पल के चलीं. मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद वे लगातार पैदल चलती रही. राष्ट्रपति के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी पैदल चलते रहे. राष्ट्रपति ने अपने twitter अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. इसमें लोग जय जगन्नाथ-जय जगन्नाथ के जयकारे लगाते देखे-सुने गए. 

यह पहला मौका है जब मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने के बाद ओडिशा आई. उन्होंने सबसे पहले जगन्नाथ पुरी दर्शन पूजन किया. उनके आगमन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. साथ ही मुर्मू के स्वागत में बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे खड़े दिखे. 


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