आम लोगों की बढ़ सकती है परेशानी, 26 और 27 को हड़ताल पर रहेंगे बैंककर्मी

आम लोगों की बढ़ सकती है परेशानी, 26 और 27 को हड़ताल पर रहेंगे बैंककर्मी

PATNA : आपको बैंक में कोई काम काज हो तो उसे 26 सितम्बर से पहले निपटा लेने प्रयास करें. अन्यथा आपको चार दिनों का इन्तजार करना पड़ सकता है. 26 और 27 सितम्बर को बैंक कर्मचारियों के चार संघो की ओर से हडताल का आह्वान किया गया. इसमें चार बड़े संघ AIBOC ,AIBOA ,INBOC और NOBO के लाखों अधिकारी और कर्मचारी अपने विभिन्न मांगों के समर्थन में और सरकार की बैंक विरोधी नीतियों के विरोध में 48 घंटों के लगातार हड़ताल पर रहेंगें. इसकी जानकारी AIBOC बिहार और SBIOA पटना मंडल के महासचिव अजीत कुमार मिश्रा, INBOC के महासचिव आर के चटर्जी और AIBOA के महासचिव डॉ.कुमार अरविन्द ने संयुक्त सवाददाता सम्मलेन में दी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर इसका सकारात्मक असर नहीं हुआ तो नवम्बर माह के दुसरे सप्ताह में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की भी तैयारी है. 


मिश्रा ने बताया कि पिछले 2 साल से अधिक समय से लंबित वेतन समझौता सरकार के इशारे पर आईबीए द्वारा दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से डाला जा रहा है, जिसके कारण बैंकिंग उद्योग के लाखों अधिकारियों और कर्मियों में आक्रोश है. वेतन समझौता के अलावा चार्टर ऑफ डिमांड में सप्ताह में 5 दिनों का कार्यकाल लागू करने के अलावा कैश लेनदेन की अवधि को कम करने, पेंशन संबंधी विसंगतियों को दूर करने, कार्यस्थल पर काम के दबाव को कम करने के लिए नियमित भर्ती अभियान, न्यू पेंशन स्कीम को रद्द करने और परफॉर्मेंस के आधार पर अधिकारियों का उत्पीड़न समाप्त करने जैसे मुद्दे हैं.

 उन्होंने कहा कि एक ओर जहां पूरे विश्व में सभी वित्तीय संस्थाएं सप्ताह में 5 दिन काम करती है. वही इस डिजिटल युग में हमारी पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग को भी लंबित रखा जा रहा है. जिसके कारण सुबह से शाम तक कार्य करने वाले हमारे अधिकारियों और कर्मियों के स्वास्थ्य एवं सामाजिक जीवन पर विपरीत परिणाम देखे जा रहे हैं. मिश्रा ने यह भी कहा कि वित्त मंत्री के प्रस्तावित बैंक मर्जर के खिलाफ भी अधिकारियों में रोष व्याप्त है. जहां बैंकों का प्राथमिक उद्देश्य बैंकिंग सेवा को जन-जन तक पहुंचाना है. वहीं सरकार ने बैंकों को मर्जर करके करीब 2000 से अधिक शाखाओं को बंद करके बैंकिंग सेवा को आम आदमी से दूर कर दिया है. मिश्रा ने कहा कि एक ओर जहां सरकार अपनी सभी योजनाओं का क्रियान्वयन सरकारी बैंकों द्वारा कराती है वहीं दूसरी ओर इन्हें मर्ज करके कम कर रही है. सरकार छोटे-छोटे प्राइवेट पेमेंट बैंक एनबीएफसी इत्यादि को लाइसेंस दे रही है.

 यह ज्ञात होना चाहिए कि सरकार 2022 तक 5 ट्रिलियन इकोनामी का जो सपना देख रही है. वह सरकारी बैंकों के सहयोग के बिना असंभव है. वह मर्जर करके इन बैंकों के अस्तित्व एवं क्रियाकलापों को बाधित कर रही है. जिससे उसके सपने में भी बाधा उत्पन्न होगी. अभी-अभी वित्त मंत्री ने 400 जिलों में लोन मेला लगाने को कहा है. जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ेगी. मिश्रा ने यह भी कहा कि सरकार की सभी वित्तीय नीतियों का क्रियान्वयन करने के लिए हमारे बैंक अधिकारी सुबह 9:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक कार्य करते रहते हैं. लेकिन अपनी सेवा संबंधी सुविधाओं और वेतन बढ़ोतरी के लिए सरकार के इशारे पर आईबीए लगातार टालमटोल कर रही है.

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