रघुवंश सिंह ने लिखी चिट्ठी,कहा- RJD की मजबूती के लिए पत्र लिखा उसे पढ़ा तक नहीं,पार्टी में सचिव से ज्यादा महासचिव बनाए जाते हैं..

रघुवंश सिंह ने लिखी चिट्ठी,कहा- RJD की मजबूती के लिए पत्र लिखा उसे पढ़ा तक नहीं,पार्टी में सचिव से ज्यादा महासचिव बनाए जाते हैं..

PATNA: राष्ट्रीय जनता दल से इस्तीफा देने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह के तेवर तल्ख हैं।वे अपने निर्णय से एक कदम भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। रघुवंश सिंह भले हीं अस्पताल में भर्ती हों लेकिन वे चिट्ठी लिखकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पूरी पोल खोल रहे हैं। राजद के वरिष्ठ नेता रहे  रघुवंश सिंह ने एक और पत्र लिखा है। लालू प्रसाद को लिखे पत्र में  कहा है कि, राजद में सामंती माहौल है इसलिए विचारधारा पर बहस के कोई मायने नहीं है।

हमने मजबूती के लिए पत्र लिखा उसे ताक पर रख दिया

रघुवंश सिंह ने लालू प्रसाद को लिखे अपने पत्र में बड़े ही निराशा से लिखथे हैं कि हमने संगठन की मजबूत के लिए पत्र लिखा था।लेकिन हमारे उस पत्र को ताक पर रख दिया गया और पढ़ने का भी कष्ट नहीं किया गया.वेंटिलेटर पर जाने से पहले रघुवंश बाबू ने एक साथ 5-6 पन्नों में पत्र लिखा था.

राजद में सामंती माहौल

अस्पताल के बेड से लिखे गए 6 पन्नों के पत्र में कई पन्ना सार्वजनिक हो गया है। रघुवंश ने राजद की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया है.उन्होंने कहा है कि राजद में सामंती माहौल है। वहां अब विचारधारा पर बहस की गुंजाइश नहीं है।जिस समाजवादी मंच से हम लोग कहते रहे कि रानी के पेट से नहीं, बैलेट बक्से से राजा पैदा होता है, वहां पर क्या हो रहा है, इसे लोग देख रहे हैं।

सचिव से ज्यादा महासचिव बनाना हास्यास्पद नहीं तो क्या है ? 

रघुवंश बाबू ने राजद का नाम लिए बिना कहा कि संगठन में सचिव से ज्यादा महासचिव बनाना हास्यास्पद नहीं तो क्या है ? जयकारा लगवाने और रोज के बयान से राजद अपने विरोधियों से कैसे निबटेगी। इतना बड़ा जनाधार और कार्यकर्ताओं को बिना काम के बैठाकर रखने का उदाहरण दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा। उन्होंने अपने पत्र में अँतिम में लिखा है कि  अब इस नारे की गुंज भी गायब हो गई है- ‘ सावधान पद और पैसे से होना है गुमराह नहीं, सीने पर गोली खाकर निकले मुख से आह नहीं......।

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