राहुल के जीत की राह होगी कठिन, गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे इस नेता के बेटे ने राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ने का किया ऐलान

राहुल के जीत की राह होगी कठिन, गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे इस नेता के बेटे ने राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ने का किया ऐलान

NEWS4NATION DESK : कांग्रेस की परंपरागत और गांधी परिवार के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाली उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट पर इसबार कड़ा मुकाबला होने जा रहा है। एक ओर जहां इस सीट से बीजेपी की स्मृति ईरानी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को टक्कर देने के लिए तैयार हैं, वहीं दूसरी ओर गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे एक स्थानीय नेता के बेटा भी राहुल को टक्कर देने के लिए चुनाव मैदान में उतरने जा रहे है। 

मिली जानकारी के अनुसार कभी पूर्व पीएम राजीव गांधी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के अमेठी में प्रस्तावक रहे स्थानीय कांग्रेसी नेता हाजी सुल्तान खान के बेटे हाजी हारून रशीद अमेठी से चुनाव लड़ेंगे। हाजी सुल्तान ने साल 1991 के संसदीय चुनाव में राजीव गांधी के और साल 1999 में सोनिया गांधी के नामांकन में प्रस्तावक थे। हारून रशीद का अमेठी से चुनाव लड़ने की खबर कांग्रेस के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है।
 
 बताया जा रहा है कि कांग्रेस में पूरी तरह से हाशिये पर डाल दिये जाने से नाराज हारून रशीद ने पिछले दिनों पार्टी से किनारा कर लिया था। वहीं अब उन्होंने अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। गांधी परिवार के नजदीकी होने के बावजूद राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात पर हारून का कहना है कि कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व लंबे समय से हमारी उपेक्षा कर रहा है। और इस वजह से क्षेत्र के साथ-साथ समुदाय का विकास में दिक्कतें आईं हैं।

हारून का दावा है कि इस क्षेत्र से उनकी जीत पक्की है। उन्होंने कहा है कि अमेठी लोकसभा क्षेत्र में लगभग 6.5 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। स्थानीय सांसद और कांग्रेस की उपेक्षा से नाराज इसबार सभी ने कांग्रेस के खिलाफ मतदान करने का निर्णय लिया है। 

उन्होंने कहा कि मेरा परिवार एक दशक से कांग्रेस और खासकर गांधी परिवार का समर्थन करता रहा है, लेकिन पिछले कई सालों से उनके परिवार की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के साथ अपने पिता हाजी सुल्तान खान की तस्वीरों को भी दिखाया। 

हारून ने कहा कि अमेठी में लोगों को यह भी शिकायत है कि राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में असमर्थ रहे हैं। अमेठी की सीट लगभग चार दशकों से गांधी परिवार के ही खाते में ही रही है। बावजूद इसके इसका जितना विकास होना चाहिए था वह नहीं हो पाया है। 

गौरतलब है कि साल 2004 में सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के लिए यह सीट छोड़ दी थी। जिसके बाद राहुल अमेठी से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। उसके बाद से राहुल गांधी ही इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 

बता दें कि वर्ष 2014 के चुनाव में राहुल गांधी को कड़ी टक्कर देने वाली स्मृति ईरानी इसबार फिर उनके सामने है। वहीं हारून रशीद के चुनाव मैदान में आने का ऐलान कर राहुल गांधी की परेशानी और बढ़ा दी है। गांधी परिवार के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले अमेठी सीट पर इसबार राहुल के जीत की राह कठिन होने जा रहा है।  

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