रेलवे का टेंडर और राशि वसूलती है अधिकारियों की पत्नी द्वारा संचालित महिला कल्याण संगठन...अवैध वसूली में रेलवे अफसरों का साथ !

रेलवे का टेंडर और राशि वसूलती है अधिकारियों की पत्नी द्वारा संचालित महिला कल्याण संगठन...अवैध वसूली में रेलवे अफसरों का साथ !

PATNA: रेलवे में गजब का खेला चलता है।संपत्ति रेलवे की और उस पर किराया वसूलती है अफसरों की पत्नी द्वारा संचालित महिला कल्याण संगठन।बिहार की बात करें तो दानापुर,हाजीपुर,सोनपुर समेत कई जगहों पर रेलवे कॉलनी, या डीआरएम दफ्तर कैंपस या फिर पूर्व मध्य रेलवे  कार्यालय के भीतर भी कई दूकानें संचालित हो रही हैं।जिसका किराया महिला कल्याण संगठन वसूलती है।

देश में ऐसा कोई विभाग नहीं होगा जिसकी कमाई उन विभागों में काम करने वाले ऑफिसर्स की पत्नियों को खर्च करने का अधिकार हो।लेकिन रेलवे की कमाई को महिला कल्याण संगठन के हवाले कर दिया गया है।यह खेल कोई एक दिन से नहीं चल रहा बल्कि लंबे समय समय से अधिकांश रेल मंडल में संचालित हो रहे हैं।अगर कोई आवाज उठाए तो संगठित होकर दबाने की कोशिश की जाती है।चाहे रेलवे का विजिलेंस हो या रेल प्रशासन।सभी लोग एक साथ इस आवाज को दबाने में जुट जाते हैं।कई जगहों पर इसके खिलाफ आवाज भी उठाई गई तो अवैध वसूली बंद भी हुई।लेकिन आज भी कई स्थानों पर यह कारानाम खुलेआम संचालित हो रहा है।

आवाज उठाने पर भुगतना पड़ा खामियाजा 

बिहार के खगौल के रंजीत मिश्रा को 2013 में सुधा पार्लर के लिए डीआरएम दफ्तर के सामने दूकान खोलने की इजाजत मिली।हालांकि यह मंजूरी पटना डेयरी को मिली थी जिसे रंजीत को दिया गया था।उसके बाद हर महीने महिला संगठन के सदस्य किराया मांगने लगे।जब दूकानदार रंजीत मिश्रा ने रसीद मांगी तो धमकाया जाने लगा।जब उन्होंने किराया देने से कार किया तो दूकान को अवैध बताकर तोड़ दिया गया।उसके बाद 6 अन्य दूकानें सील कर दी गईं।महिला कल्याण संगठन के दबाव में रेल प्रशासन ने यह कार्रवाई की।उसके बाद इन्होंने महिला कल्याण संगठन की कारगुजारियों को सार्वजनिक करने का फैसला किया।तभी से वे लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं।

क्या है महिला कल्याण संगठन

महिला कल्याण संगठन भारतीय रेल में सिर्फ रेल अधिकारियों की पत्नियों द्वारा चलाई जाने वाली संस्था है।संगठन डिवीजन,जोन स्तर पर होता है।डिविजन में डीआरएम की पत्नी अध्यक्ष होती हैं जबकि जोन में जीएम की पत्नी।संगठन सांस्कृतिक कार्यक्रम से लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाती है।

क्या कहते हैं प्रभारी सीपीआरओ 

महिला कल्याण संगठन शब्द जैसे हीं पूर्व मध्य रेल के प्रभारी सीपीआरओ रंजीत कुमार सिंह के कान में गया उसके बाद वे आगे का सवाल सुनने को भी तैयार हीं नहीं हुए। सवाल पूरा भी नहीं हुआ और उन्होंने पूरी बात को हीं खारिज कर दिया।उन्होंने कहा कि हम पूरी बात समझ गए और आपका जो भी आरोप है वो पूरी तरह से गलत है।महिला कल्याण संगठन को किसी प्रकार का कोई टेंडर नहीं दिया गया है और न हीं वह संस्था कोई वसूली करती है।

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