... अब आईआरसीटीसी के हवाले होगा रेलवे का विंडो टिकट काउंटर

... अब आईआरसीटीसी के हवाले होगा रेलवे का विंडो टिकट काउंटर

PATNA: रेलवे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम यानी पीआरएस में आपसी टकराव को रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने इसे पूरी तरह आईआरसीटीसी हवाले करने का प्रस्ताव किया है. फिलहाल पीआरएस का केबल ऑनलाइन डिवीजन आईआरसीटीसी के पास है, जबकि विंडो अथवा काउंटर बुकिंग सेंटर फॉर रेलवे इनफॉरमेशन सिस्टम कृष के पास है. अब दोनों को आईआरसीटीसी को देने की तैयारी शुरू कर दी गई है इस संबंध में रेलवे बोर्ड की तरफ से परिपत्र जारी किया गया है.

सूत्रों के अनुसार पीआरएस को पूरी तरह आईआरसीटीसी के हवाले करने के पीछे ऑनलाइन बुकिंग को बढ़ावा देना तथा विंडो टिकट ओं को समित सीमित करने और अंततः पूरी तरह समाप्त करने का मकसद है. इससे पीआरएस में लगने वाले हजारों कर्मचारियों की जरूरत समाप्त होगी और उन्हें अन्य अपेक्षाकृत ज्यादा जरूरी कामों में लगाया जा सकेगा. रेलवे के अधिकारी पीआरएस काउंटर की संख्या कम होने तथा प्राइवेट एजेंटों की नियुक्ति के साथ यह प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है. पीआरएस का पूरा काम किसी को मिलने पर अब उनके कर्मचारी अधिकारी काउंटर  को संभालेंगे.

गौरतलब है कि पीआरएस के तहत रोजाना 12 लाख से अधिक टिकटों की बुकिंग की जाती है. कृष्ण द्वारा तैयार पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम से फिलहाल अधिक टिकटों की बुकिंग होती है .इनमें 68 फ़ीसदी टिकट आईआरसीटीसी की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुक होते हैं जबकि शेष 32 फ़ीसदी काटे विंडो या काउंटरों के लिए खरीदे जाते हैं . 

 साल 2019 के दौरान रोजाना करीब ऑनलाइन बुकिंग के जरिए लगभग 14 यात्रियों ने ट्रेन में यात्रा का इंतजाम किया जिसके मुकाबले विंडो या काउंटर से केवल तीन लाख टिकट ही खरीदे जो 6.5 लाख यात्रियों के लिए थे.

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