राम बालक महतो के निधन पर नीतीश कुमार ने जताया शोक

राम बालक महतो के निधन पर नीतीश कुमार ने जताया शोक

बिहार के पूर्व महाधिवक्ता राम बालक महतो के निधन पर मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार ने जताया शोक. नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा  की वे एक प्रसिद्ध कानूनवादी और बहुमुखी प्रतिभा के धनि व्यक्ति थे. विधि के क्षेत्र में उन्होंने एक विशिष्ट पहचान बनाई थी. उनके निधन से विधि के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है.

मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चीर शांति तथा उनके परिजनों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की इश्वर से प्राथना की है.

 रामबालक महतो ने छह बार राज्य का महाधिवक्ता बनकर इतिहास रच दिया है। 1937 से अब तक 20 जाने-माने वकीलों को महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है, जिनमें छह बार महतो को ही इस पद पर बहाल किया गया। इनके अलावा केवल कन्हैया प्रसाद वर्मा को ही दो बार महाधिवक्ता बनने का अवसर प्राप्त हुआ था। पहली बार 5 अप्रैल, 1980 को महतो बिहार के महाधिवक्ता बने और 9 जुलाई, 1980 तक इस पद पर रहे।

दूसरी बार 5 अप्रैल, 1985 से 11 दिसंबर, 1989 तक, तीसरी बार 12 अप्रैल, 1990 से 1 दिसंबर, 1993 तक, चौथी बार 29 नवंबर, 2010 से 19 फरवरी, 2015 तक, पांचवीं बार 27 फरवरी, 2015 से 24 नवंबर, 2015 तक और छठी बार 25 नवंबर को इस पद पर आसीन हुए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण मामलों में राज्य सरकार को कानूनी जीत दिलाई।

उनकी टीम में काम करने वाले अनेक वकीलों को हाईकोर्ट का जज बनने का अवसर प्राप्त हुआ। कई तो मुख्य न्यायाधीश तक बने। छठी बार महाधिवक्ता बनने के बाद से ही महतो के आवास और दफ्तर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। वरीय अधिवक्ता कृष्णा प्रसाद सिंह ने कहा कि महतो ने न्याय के क्षेत्र में जो कीर्तिमान स्थापित किया है और गार्जियन की तरह आम वकीलों को स्नेह और सम्मान दिया है।

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