बढ़ाई जाए जजों की रिटायरमेंट उम्र, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की सरकार से मांग

बढ़ाई जाए जजों की रिटायरमेंट उम्र, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की सरकार से मांग

पटना. बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया ने अन्य राज्यों के बार कॉउंसिल और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से विचार विमर्श के बाद निष्कर्ष पर पहुंचे है कि भारत के सुप्रीम व हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृति उम्र बढ़ाई जाए।

बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि शीघ्र भारतीय संविधान में संशोधन कर इनकी सेवानिवृति की उम्र सीमा बढ़ाई जाए। सुप्रीम कोर्ट के जजों की सेवानिवृति की उम्र सीमा 65 वर्ष से बढ़ा कर 67 वर्ष की जाए। साथ ही हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृति की उम्र सीमा बढ़ा कर 65 वर्ष किया जाए। 

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एन वी रमना ने इस वर्ष अप्रैल महीने में विचार व्यक्त किया था कि 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत होना कुछ जल्दी हैं। जस्टिस Venkatchalliah ने  अपने 2002 के रिपोर्ट में ये अनुशंसा की थी कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की सेवानिवृति की उम्र 68 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट के जजों की सेवानिवृति की उम्र 65 वर्ष होनी चाहिये। भारत दुनिया के उन कम देशों में है, जहां जजों की सेवानिवृत होने की उम्र बहुत कम हैं 

दरअसल, अमेरिका में जज जीवनपर्यंत जज होते है। नॉर्वे, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड आदि देशों में जजों की सेवानिवृति की उम्र सीमा 70 वर्ष, जर्मनी में 68 वर्ष और कनाडा में जजों के सेवानिवृति की उम्र सीमा 75 वर्ष होती है।


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