राजद में शामिल हुए जदयू और भाजपा के दर्जनों कार्यकर्ता, कहा तेजस्वी करोड़ों लोगों की आकांक्षा, सपना और उम्मीद है

राजद में शामिल हुए जदयू और भाजपा के दर्जनों कार्यकर्ता, कहा तेजस्वी करोड़ों लोगों की आकांक्षा, सपना और उम्मीद है

SUPAUL : बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीयजनता दल के नेता तेजस्वी यादव चुनाव प्रचार में पूरे जोरशोर से जुटे हुए हैं. अपनी पार्टी की तरफ से चुनाव अभियान का नेतृत्व कर रहे तेजस्वीप्रतिदिन छह से भी ज्यादा चुनावी सभाएं कर रहे हैं, जिनमें कोरोना संकटके बावजूद लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. इस भीड़ को देखकर आरजेडीसहित महागठबंधन के सभी दल उत्साहित हैं और इसे बदलाव का संकेत बता रहेहैं. बता दें कि आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को त्रिवेणीगंज 44 विधानसभा चुनावी सभाओं कोसंबोधित किया. इसी दोरान जदयू के विधायक प्रतिनिधि संजय कुमार रंजन व भाजपा के वरिष्ठ नेता अरविंद कुमार सिंह, मनरोमा देवी,राजकुमार मंडल ,प्रमोद मंडल, अशोक राम,छत्रधारी साह, देव नारायण शर्मा,मोहम्मद गफुर ,पाचु मुखिया, देवन मुखिया, हरि नंदन यादव, शंकर ठाकुर, बजरंग चोधरी, सुरेश कुमार साह, फुलेन्दर कुमार, मोहम्मद बेचन, शोभालाल शर्मा, अमरेन्दर कुमार, चन्द्रदेव मंडल, अरविंद साह, कुभनायरण सरदार, सुखदेव पासवान, प्रदीप कुमार सहित आरजेडी में शामिल हुए हैं. इससे पहले भी तेजस्वी ने कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया था, जहां करीब-करीब हर जगहलोगों की भारी भीड़ देखी गई. तेजस्वी यादव की सभाओं में भारी भीड़ सेआरजेडी समेत महागठबंधन में शामिल सभी दल उत्साहित हैं. भाजपा व जदयू के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी का कहना है कि बिहार में नीतीश सरकार से लोग नाखुश हैंऔर लोग एक युवा मुख्यमंत्री की चाहत में तेजस्वी यादव के साथ जुट रहेहैं. उन्होंने त्रिवेणीगंज विधानसभा क्षेत्र से संतोष कुमार सरदार के जीत का दावा किया. वही अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि तेज रफतार तेजस्वी की सरकार अबकी बार बिहार में तय है. उन्होंने कहा की नीतीश कुमार की सरकार में विकास नही विनाश हुआ है. आम लोगों को दल दल में ढकेल दिया है, अब सिर्फ तेजस्वी ही सहारा है. 

उन्होंने दावा करते हुए कहा कि रैलियों में भीड़ सेइसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह भीड़ तेजस्वी को सुनने पहुंच रहीहै. बिहार में विधान सभा चुनाव बहुत रोचक हो गया है. प्रचार में एक तरफसत्ता पक्ष के बड़े बड़े दिग्गज हैं तो दूसरी ओर 29 वर्ष के तेजस्वी यादवअकेल व अभिमन्यु की भांति नितांत तन्हा. ये युवा प्रत्यारोपों में फंसने की बजाए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे बड़ी शिद्दत से उठाता है और अपना जनसमर्थन बढ़ाता जा रहा है. तेजस्वी की जनसभाओं में भीड़और उसका उत्साह देखते ही बनता है. भीड़ को देख मोदी जी का प्रथम चुनाव याद आता है. 

2014 में भीड़ का जो उन्मादी समर्थन दिखता था, इस बार तेजस्वी के साथ बिल्कुल वैसा ही दिख रहा है. उनकी शालीनतापूर्ण आक्रमकता सटीक बैठ रही है. 15 लाख मिले, 2 करोड़ नौकरियां मिली, जैसे सवाल जब जनता से तेजस्वी करते हैं तो भीड़ नही नही का जब जवाब देती है. तब उस वक्त देखने लायक होता है. चुनावी प्रचार के दौरान तेजस्वी केंद्र सरकार पर तो निशाना साध ही रहे हैं. लेकिन उनका मुख्य निशाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हीं हैं. वैसे तेजस्वी यादव ने बिहार चुनाव के लिए प्रचार में जाने के पहले 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा कर यह संकेत दे दिया था कि अपनी चुनावी सभाओं में वे बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाएंगे. चुनावी सभाओं में उमड़ रहे जनसैलाब को लेकर कहा भी जा रहा है कि इसी मुद्दे के कारण लोग, खासकर युवा उनसे जुड़ रहे हैं. उन्होंने कहा की महागठबंधन की सभाओं में उमड़ रहा जनसैलाब लोगों के लिए भीड़ हो सकती है. लेकिन तेजस्वी करोड़ों बिहारवासियों की आकांक्षाएँ, सपने और उम्मीदें है, जिन्हें पूरा करना है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की चुनावी सभाओं में उमड़ती भीड़ की 40 फीसदी भागीदारी भी अगर मतों में तब्दील हो गयी तो तय मानिए कि तेजस्वी महागठबंधन की नैया के वो खेवनहार साबित होंगे जो अपने पहले ही महाप्रयास में खुद को साबित व स्थापित कर दिखाएंगे.

उन्होंने कहा की विधानसभा चुनाव की सभाओं में बाकी रैलियों की तरह भीड़ जुटाई नहीं जाती, ज्यादातर भागीदारी समर्थकों की होती है और लगभग 5 फीसदी लोग ऐसे होते हैं, जो समर्थक नहीं होते हुए भी समर्थन देने की ऊहापोह में आकलन करने के लिए शामिल होते हैं. बदलाव चाहती जनता के लिए विकल्प के तौर पर पहले प्रीफ्रेंस के रूप तेजस्वी अपने प्रतिद्वन्द्वियों से आगे हैं और प्रारंभिक बढ़त बनाए हुए हैं. अगर तेजस्वी तीसरे दौर के मतदान तक इस बढ़त को बरकरार रख पाए तो तय मानिए कि राजद सबसे बड़ी पार्टी बन कर एक बार फिर उभरेगी. वैसे चुनावी गंगा में अभी बहुत पानी बहना बाकी है, बहाव – कटाव का खेल भी होना बाकी है. वैसे, चुनावी सभाओं में भीड़ को देखकर आरजेडी के नेता जरूर उत्साहित हैं, लेकिन यह भीड़ वोट के रूप में कितना बदलेगी, यह तो 10 नवंबर को चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा. लेकिन फिलहाल की स्थिति में इतना तो तय है कि तेजस्वी की सभाओं में उमड़ रही भीड़ नीतीश कुमार और बीजेपी के माथे पर पसीना लाने के लिए काफी है. 

सुपौल से पप्पू आलम की रिपोर्ट 


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