बदलते बिहार में सड़कों की बहार, गंगा पर 14 पुल बनने से आवागमन हो जाएगा आसान

बदलते बिहार में सड़कों की बहार, गंगा पर 14 पुल बनने से आवागमन हो जाएगा आसान

पटना. किसी दौर में बिहार के लिए कहा जाता था कि यहाँ सड़क और गड्ढे का अंतर करना मुश्किल है. सड़क पर गड्ढा है या गड्ढे में सड़क यह पता नहीं चलता था. लेकिन, अब बिहार में सड़कों की बहार है. एक साथ कई राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण ने राज्य में आवागमन की सुविधा बढ़ा दी है. 

बावजूद इसके बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार आने जाने के लिए गंगा पार करना आज भी चुनौतीपूर्ण है. मोकामा का राजेन्द्र सेतु पिछले करीब 60 साल से तो पटना का गाँधी सेतु चार दशकों से गंगा पार करने का मुख्य मार्ग है. ऐसे में कई जिलों की दूरी तय करने के लिए वाहनों  का सफर अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है. लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव होता दिख रहा है. 

बिहार में अगले कुछ वर्षों में गंगा नदी पर 14 पुल बन जाएंगे. पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने पटना में मौजूदा जेपी सेतु के समानांतर एक अन्य सेतु के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की. केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट किया था कि पटना में जेपी सेतु के समानांतर एक नया पुल बनेगा. इसे पटना के निकट एनएच 139 से प्रारंभ होकर अरेराज होते हुए बेतिया जाने वाली भारतमाला सड़क परियोजना में शामिल किया जाएगा. साथ ही इसे नए राष्ट्रीय राजमार्ग 140डब्ल्यू के रूप में घोषित कर दिया गया है. 


यह बिहार में गंगा नदी पर बनने वाला 14वां पुल होगा. अभी पटना में गाँधी सेतु और जेपी सेतु है. वहीं गंगा पर एक पुल आरा और छपरा के बीच है. मोकामा में राजेन्द्र सेतु के समानांतर एक छह लेन सड़क पुल तो एक रेल पुल का निर्माण गतिमान है. भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पहले से है. इसके आलावा बख्तियारपुर, मुंगेर आदि जगहों पर गंगा पर पुल निर्माण का कार्य गतिमान है. 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ वर्ष पूर्व ही कहा था कि बिहार के विकास के लिए जरूरी है कि गंगा नदी पर हर 50 से 60 किलोमीटर की दूरी पर गंगा नदी पर पुल हो. इससे राज्य के आधे से ज्यादा जिले एक दूसरे से सीधे जुड़ जाएंगे. माल ढुलाई हो या यात्री परिवहन दोनों स्थितियों में अभी जिस दूरी को तय करने के लिए 3 से 6 घंटे का समय लगता है उसे आधे से एक घंटे में पूरा किया जा सकेगा. 

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