मोहन भागवत बोले- मॉब लिंचिंग के नाम पर भारत को बदनाम करने की साजिश

मोहन भागवत बोले- मॉब लिंचिंग के नाम पर भारत को बदनाम करने की साजिश

दशहरा के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात कही। मोहन भागवत ने आज इस अवसर पर शस्त्र पूजन के बाद स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि लिंचिंग की उत्पत्ति पश्चिमी देशों में हुई है। इसे भारत पर नहीं थोपा जाना चाहिए। ये भारत को बदनाम करने की साजिश है। भारत छोड़ में इतनी विविधताओं के बाद भी लोग एक साथ शांति से रहते हैं।

मोहन भागवत ने कहा कि एक समुदाय के लोगों द्वारा दूसरे समुदाय के व्यक्ति को चोट पहुंचाने वाली खबरें आती हैं। ऐसा दूसरे समुदाय की तरफ से भी होता है। कभी-कभी कुछ नहीं होता तो भी बात बढ़ाई जाती है। दोनों तरफ से एक घटना के लिए पूरे समुदाय में जिम्मेदार समझा जाता है। समाज को एक करने वाली ताकतों को उसमें घसीटा जाता है। 

उन्होंने कहा कि लिंचिंग जैसा शब्द हमारे यहां कभी था नहीं। जहां ऐसी घटनाएं होती रही हैं, वहां से ऐसा शब्द आया। हमारे यहां ऐसी घटनाएं नहीं हुईं। यहां कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई। बाहर से आए शब्दों का इस्तेमाल कर हमारे देश को बदनाम करने की कोशिश होती है। इतनी विविधता वाले लोग शांति से दुनिया में कहीं भी नहीं रहते।

संघ प्रमुख ने कहा कि जहां भी जाएंगे, वहां की कानून व्यवस्था का पालन करके ही हम रहेंगे, यही संस्कार संघ के स्वयंसेवकों को मिलता है। अब अपना समाज है, अपना देश है, अपने लोग हैं। सारा भारत, सारे भारतीयों का है। सबको कानून का पालन करके ही रहना चाहिए। ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कानून को सख्त करना चाहिए। इसमें अपना-पराया नहीं देखना चाहिए। स्वयंसेवक सत्ता में है तो उसकी यही सीख है। कहीं मतभेद है, तो संवाद से निर्णय होना चाहिए। तब भी बात न बने तो कानून है। निर्णय मन से स्वीकार नहीं है, तो अपील करने का प्रावधान है।

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