आरएसएस को लेकर लालू और नीतीश में खिचड़ी पकनी शुरू, नीतीश के वार पर लालू ने कैसे किया इजहार ? समझिए इस रिपोर्ट में...

आरएसएस को लेकर लालू और नीतीश में खिचड़ी पकनी शुरू, नीतीश के वार पर लालू ने कैसे किया इजहार ? समझिए इस रिपोर्ट में...

Patna:28  मई को जब नीतीश सरकार ने बीजेपी से जुड़े संगठनों पर लेटर वार किया  तो लालू ने आरएसएस को लेकर कैसे इजहार किया इससे समझने के लिए पहले जरा लालू प्रसाद द्वारा फेसबुक पर 10 जुलाई को आरएसएस को लेकर किए गए पोस्ट के महत्वपूर्ण अंश को पढ़िए----- 

2009 में मैंने सारण लोकसभा से चुनाव जीता लेकिन मैं सिर्फ एक सांसद भर था। यूपीए-2 में ममता बनर्जी मेरी जगह पर रेल मंत्री बनीं। इसके अलावा चार साल पहले ही राजद ने बिहार में भाजपा-जदयू के हाथों सत्ता गँवा दी थी। हमेशा की तरह मैं ग्रामीण क्षेत्रों में जाता था और देखता किस तरह भाईचारे वाले माहौल को खराब किया जा रहा है।

लोगों के बीच जाने पर मुझे आरएसएस के अभियान की कुछ खास जानकारियां मिली। 2005 में जब नीतीश ने कमान संभाली,तब इस संगठन का बिहार में मामूली प्रभाव था क्योंकि मेरे सत्ता में रहते आरएसएस के कार्यकर्ताओं में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे राज्य के किसी भी हिस्से में अपनी शाखाएं लगाएं। 2005-13 के दौरान जब आरएसएस बिहार के अंदरूनी इलाकों में अपनी गतिविधियों को बढ़ा रही थी और साम्प्रदायिकता फैला रहा था,तब नीतीश निष्क्रिय बने रहे।उन्होंने समाजवाद और लोहिया के आदर्शों की शपथ ली,लेकिन सिर्फ अल्पसंख्यकों को भ्रमित करते रहे

RSS ने दरभंगा,मधुबनी और कोसी-सीमांचल क्षेत्रों के बड़े हिस्से में अपने शिविर आयोजित करने शुरू किए जहाँ अल्पसंख्यक की तादाद अच्छी थी। मैंने चुपचाप राजद के कुछ युवाओं को इन कैम्प में भेजा ताकि इस संगठन की योजनाओं की जानकारी हासिल हो सके। RSS ऐसे गैर मुस्लिम गाँव मे अपनी शाखाएं लगा रहा था, जहाँ अधिकाँश लोग पिछड़े और दलित जातियों के थे। मेरे 'भेदियों' ने कुछ सनसनीखेज खुलासे किये। RSS अपने शिविर आयोजित करने के लिए जानबूझकर ऐसे गाँव को चुनता था, जहां गरीब हिन्दू रहते थे और जहाँ से कुछ मीटर की दूरी पर अल्पसंख्यकों की बस्तियां होती थीं

इस पोस्ट में आरएसएस के खतरनाक इरादों के बारे बताते हुए लालू प्रसाद ने कहा है कि राजद के सत्ता गंवानें के बाद किस तरीके से एनडीए के शासनकाल में बिहार में आरएसएस ने अपना पांव पसारने का काम किया।

इस पोस्ट से ठीक पहले नीतीश सरकार ने भी अपना इरादा स्पष्ट करते हुए  बीजेपी से जुड़े तमाम बड़े से छोटे संगठनों को अपने निशाने पर लेते हुए खुफिया विभाग को जानकारी इक्ठा करने का फरमान जारी कर दिया था।अब सवाल है कि क्या आरएसएस को लेकर हीं भाजपा और जदयू में एक बार फिर से रार मचने वाली है।जिस तरीके से खुफिया विभाग ने यह लेटर जारी किया है इससे यह साबित हो रहा है कि नीतीश सरकार किसी भी कीमत पर भाजपा के बुनियादी संगठनों को बक्सने के मूड में नहीं दिख रही है।

कभी राम मंदिर तो कभी धारा 370 तो कभी इफ्तार पर जदयू और भाजपा के नेता पिछले कुछ दिनों से जर्बदस्त भिड़ंत करते दिखाई दे रहे हैं।लेकिन अब तो सरकारी स्तर पर जदयू और भाजपा के बीच सियासत शुरू हो गई है।

यह लेटर बम कहीं जानबूझकर गठबंधन में विस्फोट करने के लिए तो नहीं जारी किया गया? 

Find Us on Facebook

Trending News