थानाध्यक्षों के चीरहरण वाले पोस्ट पर बवाल, पुलिस मुख्यालय के हरकत में आने के बाद इंस्पेक्टर ने डिलिट किया पोस्ट

थानाध्यक्षों के चीरहरण वाले पोस्ट पर बवाल, पुलिस मुख्यालय के हरकत में आने के बाद इंस्पेक्टर ने डिलिट किया पोस्ट

PATNA : बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर धर्मेन्द्र कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर सरकार द्वारा हाल में बनाये गये नियमों के खिलाफ खुल्लम-खुला पोस्ट डाला था। पोस्ट के बाद पुलिस महकमे में बवाल मच गया। वहीं पुलिस मुख्यालय के हरकत में आने के बाद इंस्पेक्टर धमेन्द्र ने अपने फेसबुक वॉल से उस पोस्ट को डिलिट कर दिया है। बता दें कि  बिहार पुलिस के अफसर अब खुल्ल्म-खुल्ला सरकार के आदेश का विरोध करना शुरू कर दिए हैं। पहले पुलिस एसोसिएशन में सरकार के निर्णय का विरोध। उसके बाद अब बाकी के अधिकारी भी गृह विभाग के आदेश को खुलेयाम गलत ठहराया है।

गौरतलब है कि बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर धर्मेन्द्र कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर अपना दर्द और गुस्सा का इजहार किया था। उन्होंने एक इमोशनल पोस्ट किया था। जिसमें लिखा गया है कि...बिहार पुलिस की रीढ़ थानाध्यक्षों का आज चीरहरण हो रहा है।

जिन थानाध्यक्षों को विभाग, मीडिया,सोशल मीडिया आज दागी दागी संबोधित कर रहे हैं उनके अतीत में झांकने की भी जरूरत है। जिन लोगों ने अपने जीवन के 25 साल जनता की सेवा में गुजार दिए, ना होली मनायी ना दिवाली, ना बच्चों का जन्मदिन मनाया, ना अपना शादी की साल गिरह।

इतना ही नहीं अपने भाई बहनों की शादी को छोड़कर समाज के किसी भी शादी में ना ही शरीक हुआ और ना ही किसी अंत्येष्टि में। हां वे अवश्य शामिल हुए अपने शहीद दोस्तों  के जनाजे में। अपने जीवन के स्वर्णिम जवानी का 25 साल गुजार दिए आम जनता की सेवा में,वरीय पदाधिकारियों के वैध-अवैध आदेश के अनुपालन में। गुजारते भी क्यों नहीं वे तो पासिंग आउट परेड में ही वरीय पदाधिकारियों के आदेश का पालन करने का शपथ लेकर आये थे।फिर वैध और अवैध क्या? 

हर एक पदाधिकारी अपना आदेश का पालन करवाये। जो दूसरे को बुरा लगा दे दिए एक दाग। इनमें कितने ही ऐसे भी जख्मीं हैं जो उनसे ऊपर के पदाघिकारी के विश्वास पर खरा नहीं उतरने के कारण टारगेटेड दागदार हुए। कुछ आम जनता के अनुकूल कार्य नहीं करने के कारण आरोप लगाने के कारण दागी हुए तो कुछ मीडिया को संतुष्ट नहीं कर पाने के कारण। कुछ कार्य की अधिकता में तो कुछ अपेक्षा पर खरा नहीं उतर पाने के कारण। कर्मठ और तेज लोग सामनेवाले से भी वही अपेक्षा रखते हैं। वे भूल जाते हैं कि आपकी तरह सामने कनीय पदाधिकारी भी कर्मठ,लगनशील और तेज होते तो वे आपके कनीय नहीं समकक्ष होते।

थानाध्यक्ष सरकार और विभाग की हर कसौटी पर खरे उतरे। आपने नीति बनायी इन्होंने पालन किया। आपकी हर सफलता इन्हीं की देन है। जिस 94 बैच को आज दागदार बताया जा रहा है पूरा सुशासन उनके कठिन परिश्रम का प्रतिफल है। आपने नीति बनायी,निर्देश  दिया और पीसी किया। आज उम्र के इस पडाव पर जब उनके बच्चे सयाने हो चले हैं,उनकी प्रतिष्ठा से मत खेलें। थानेदार बनते नहीं बनाये जाते हैं। थानेदार बनाने में वरीय प्रभावित होते हैं तो यह उनका दोष है।

बता दें कि सरकार ने नई नीति बनाई है जिसके तहत वैसे पुलिस पदाधिकारी अब थानेदार नहीं बन पायेंगे जिनपर किसी तरह कोई आरोप है और विभागिय कार्रवाई चल रही है। सरकार की इस नई नीति की वजह से तकरीबन 400 पुलिस पदाधिकारी अब थानेदार नहीं बन पायेंगे।

विवेकानंद की रिपोर्ट

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