ग्रामीण विकास मंत्री ने 'प्रोजेक्ट शिवहर' के लिए वाटर फॉर पीपल इंडिया को दी बधाई, कहा हर जिले में हो ऐसी परियोजना

ग्रामीण विकास मंत्री ने 'प्रोजेक्ट शिवहर' के लिए वाटर फॉर पीपल इंडिया को दी बधाई, कहा हर जिले में हो ऐसी परियोजना

PATNA : जल स्वच्छता एवं साफ-सफाई के लिए SABC मॉडल द्वारा शिवहर जिला ने सफल व्यव्हार परिवर्तन का मार्ग अपनाया है। दरअसल वाटर फॉर पीपुल एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो भारत में लंबे समय से बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और ओडिशा में वाश (वॉटर, सैनिटेशन, हाईजिन) पर काम कर अपनी उपस्थिति दर्ज कर रखा है। साथ में 2006 से चरणबद्ध तरीके से व्यापक तौर पर सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता संबन्धित व्यवहारों में बदलाव पर काम कर रहा है। वाटर फॉर पीपुल ने 2011 से बिहार में शिवहर जिले में 'परियोजना शिवहर' की शुरुआ तकी थी। इस परियोजना के अंतर्गत सामुदायिक चापाकल निर्माण किये गए, स्कूलों में मॉडल वाश काम्प्लेक्स बनाये गए और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मॉडल शौचालय का निर्माण कराया गया तथा व्यापक स्तर पर समुदाय के लोगों का स्वछता के प्रति व्यवहार में परिवर्तन लाया गया है। प्रोजेक्ट शिवहर का मार्च 2022 में सफलता पूर्वक संपन्न किया है। प्रारंभ में यह सिर्फ  समुदाय और सरकार की भागीदारी और चैरिटी वाटर जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय दाताओं के साथ पहुंच वाले हिस्से को संबोधित करने के लिए केवल बुनियादी ढांचे का निर्माण था। लेकिन 2014 में  व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता को देखते हुए, वाटर फॉर पीपल और वन ड्रॉप फाउंडेशन ने प्रोजेक्ट शिवहर की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य  ए,बी,सी मॉडल पर काम करना था। जहाँ ( a -एक्सेस पानी  तक पहुँच),(B - बिहेवियर -स्वछता के लिए व्यवहार में बदलाव,स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं तक पहुंच ),(C - कैपिटल-पूंजी दृष्टिकोण से प्रबंधन की व्यापक समस्या का स्थायी समाधान करना है। जिसके तहत वाटर फॉर पीपल ने शिवहर में 1220 वाटर पॉइंट स्थापित किए हैं, 1220 डब्ल्यूयूसी का गठन किया है, और समुदाय में स्थायी जल शासन के लिए 12,810 महिलाओं को सफलतापूर्वक सशक्त बनाया है।


इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रवण कुमार ग्रामीण विकास मंत्री ने वर्चुअल (ऑनलाइन ) माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज की और कहा कि समाज में बिना जागरूकता बदलाव संभव नहीं। कोई भी कार्य तभी सफल हो सकता जब तक कार्य को जमीनी तौर पर समुदाय में जागरूकता पर काम किया जाए। उन्होंने वाटर फॉर पीपल इंडिया के प्रोजेक्ट शिवहर पर शुभकनाए दिया एवं आगे के जिले मुजफ्फरपुर एवं नालंदा में काम के लिए कहा की सरकार वाटर फॉर पीपल की इस काम में पूरी तरह सहयोग करेगा और चाहूंगा की और भी जिलों में जल सरंक्षण एवं स्वच्छता जैसे कार्यों को बढ़ाया जाए। बिहार सरकार पंचायती राज के डायरेक्टर रंजीत कुमार सिंह ने कहा की किसी भी  ग्रामीण  विकास  परियोजना में  अकेले सरकार द्वारा जमीनी तौर पर बदलाव संभव नहीं है ,जबकि अगर वाटर फॉर पीपल जैसी संस्था सरकार कार्यों में समर्थन करता है तो इससे बेहतर परिणाम मिलते हैं ,वाटर फॉर पीपल के प्रोजेक्ट शिवहर के सफलता पूर्वक कार्यों को देखते मुख्यमंत्री के पेयजल योजना के अंतर्गत हालिया में संस्थान एवं पंचायती राज ने एक एम ओ यू भी साइन किया है। स्वच्छ और स्वस्थ समुदायों के लिए शौचालय आवश्यक हैं और सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान करते हैं। जरूरत को देखते हुए लोगों के लिए ,वाटर फॉर पीपुल के फ्रंटलाइन टीमो  ने  प्रमुख वॉश व्यवहार, संचालन और रखरखाव हेतु कई कौशल पर क्षमता निर्माण प्रशिक्षण प्रदान करता रहा/ जिसके तहत ,समुदाय प्रबंधित तंत्र के तर्ज पर 4 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया।  स्वास्थ्य केंद्रों में बने 5 मॉडल शौचालय बनाये गए स्कूलों में 233 मॉडल शौचालयों का निर्माण किया गया ,और आंगनवाड़ी केंद्र में 01 मॉडल शौचालय का संचालन किया गया / स्कूल वाश सुविधाओं का संचालन और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती थी। इसे दूर करने के लिए, और लंबे समय तक चलने वाले समाधान बनाने के लिए मॉडल टॉयलेट ब्लॉक के साथ-साथ साथी स्कूल  छात्रों के लिए सुविधाओं को बनाए रखने और अच्छे स्वच्छता व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए 233  वाटसन समितियों का गठन किया गया। वाटर फॉर पीपल ने क्रमशः संचालन और रखरखाव और सफाई के लिए  'जलबंधु'-ग्रामीण जल मैकेनिक, निर्मल बंधु-स्वीपर के रूप में एक आत्मनिर्भर तंत्र का आविष्कार किया। 

वाटर फॉर पीपल ने समुदाय के  व्यव्हार परिवर्तन के लिए सोशल आर्ट फॉर बिहेवियर चेंज (एसएबीसी) मॉडल का उपयोग करता है, जिसका उद्देश्य है की  स्थानीय कलाओं जैसे नुक्कड़ नाटक ,मल्टी डिसिप्लिनरी शो और कहानियों के माध्यम से व्यक्तिगत और सामूहिक व्यवहार परिवर्तन को सुगम बनाना है। वाटर फॉर पीपल का मानना है कि एसएबीसी हस्तक्षेप देश में स्थायी वॉश प्रथाओं को प्राप्त करने के लिए समुदाय में  महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 15 स्थानीय कलाकारों की 01 एमडीएस टीम बनाया गया ,60 स्थानीय कलाकार को जोड़कर  नुक्कड़ नाटक की 4 टीमों को प्रशिक्षित किया गया समुदायों की मदद से 4 लघु फिल्मों का निर्माण किया गया ,10 लोक कलाकारों की एक कहानी सुनाने वाली टीम बनाया गया,10 ग्राम पंचायत से  भित्ति कला कलाकारो  को जोड़ा गया  आईपीसी उपकरण और आईईसी सामग्री पढ़ने , देखकर सिखने के  लिए एक सेट त्यार कर समुदाय में वितरण किया गया। जल संरक्षण और वाश  स्थिरता के लिए किसानों और समुदाय को शामिल कर आजीविका और सूक्ष्म वित्त एक महत्वपूर्ण पहल थी। इस पहल के तहत  छोटे किसानों के साथ कृषि में पानी के उपयोग को अनुकूलित करना, उनकी औसत घरेलू आय में वृद्धि करना है, जिससे उन्हें स्वच्छता सुविधाएं प्राप्त करने के लिए कुछ अतिरिक्त धन प्राप्त करने में मदद मिले और इस तरह सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच के साथ जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो। इसी तर्ज पर 185 किसान क्लब का गठन किया गया ,5550 किसानों को जल आर्थिक उपकरण और स्वच्छता व्यवहार पर प्रशिक्षित किया गया ,3 एफपीओ स्थापित करने में किसान क्लबों की मदद किया गया , किसानों को कृषि उपकरण के लिए रु.1 करोड़ सब्सिडी योजनाओं के तहत प्राप्त हुआ /, किसान क्लब के सहयोग से 4800 शौचालय बनाए गए शौचालय निर्माण के लिए 5,377 स्वच्छता ऋण वितरित किए गए, शिवहर के 5 ब्लॉक में 5 पीओपी बनाए गए हैं / स्वच्छता को बाजार से जोड़ने के लिए  परियोजना शिवहर ने स्थानीय युवाओं को एमएफआई के कुछ बीज धन से   प्वाइंट ऑफ परचेज (पीओपी) दुकानों को खोलने के लिए प्रोत्साहित किया एवं   शरुआत कराया गया , ताकि  सभी स्वच्छता जरूरतों के लिए एक स्थान पर दुकान पर उपब्ध हो । और समुदाय के वासियों को  यह एक अच्छा आजीविका समर्थन बन सके । यहां तक कि एमएफआई ने घरेलू शौचालय निर्माण के लिए ऋण प्रदान किया जिससे  जिले को ओडीएफ का दर्जा प्राप्त करने में मदद मिला। स्थानीय सरकार वाश  सेवाओं की सेवा वितरण और स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। प्रोजेक्ट शिवहर ने हमेशा जिला और स्थानीय सरकार के साथ घनिष्ठ सहयोग और समन्वय में काम किया है और सभी समर्थन प्राप्त किए हैं, जैसे पत्र जारी करना,आईईसी सामग्री की सह-ब्रांडिंग और इसके प्रसार समर्थन। हाल ही में, हमने बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग के साथ पाइप जल योजनाओं और स्वच्छता सेवाओं में तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। 

इस तरह पुरे दस साल सफलतापूर्वक मॉडल के उपयोग द्वारा  शिवहर परियोजना के प्रयासों से शिवहर में लोगों के जीवन में बदलाव आया है और वाश संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  जिसका फलस्वरूप आईएचएचएल कवरेज: 14% से 62% हो पाया है। वॉश सुविधा वाले स्कूल: 8 से 92% हो चुके हैं, स्वास्थ्य केंद्र: 17% से 45%, पीने के पानी तक पहुंच: 57% से 100% पहुँच पाया है। इस पुरे सफल प्रयोग के बाद ,हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि शिवहर परियोजना ने शिवहर में हर किसी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया है एवं  वाश स्थिरता के लिए हमेशा के लिए मार्ग का निर्माण किया है। इस कार्यशाला में वाटर फॉर पीपल इंडिया से कंट्री डायरेक्टर - विश्वदीप घोष , प्रोग्राम डायरेक्टर वाहिद अहमद सिद्दीकी ,स्टेट इंचार्ज विवेक शरण के साथ एस ए बी सी प्रमुख सफदर अली एवं अन्य सरकारी एवं गैर सरकारी के प्रतिनिधि  उपस्थित थे।  


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