सम्राट चौधरी का खुलासा... नीतीश ने किया था कर्पूरी ठाकुर की आरक्षण नीति का विरोध, पिछड़ों से घृणा करते हैं नीतीश

सम्राट चौधरी का खुलासा... नीतीश ने किया था कर्पूरी ठाकुर की आरक्षण नीति का विरोध, पिछड़ों से घृणा करते हैं नीतीश

पटना. बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने विद्यापति भवन में आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर सामाजिक न्याय, समतामूलक समाज और दबे कुचलों के उत्थान के लिए जीवनपर्यंत प्रयास करने वाले समावेशी नीतियों व विचारों के पुरोधा थे। जिन्होंने अपना जीवन पूरी सादगी से गुजार दिया। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों के प्रति उनका सम्मान, कार्यकर्ताओं के प्रति उनका सद्भाव व सहृदयता और गरीबों के बारे में उनकी सोच के कई लोग आज भी कायल हैं।

उन्होंने कहा कि 1978 में कर्पूरी ठाकुर ने गरीबों अतिपिछड़ों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की तब नीतीश कुमार ने उनकी आरक्षण नीति का पुरजोर विरोध किया था। दरअसल नीतीश कुमार को अति पिछड़ों से घृणा है। तब बाकियों की ओर से भी कर्पूरी को काफी कुछ सुनने को मिला और कईयों ने तो जननायक कर्पूरी ठाकुर को गालियां भी दी। बावजूद उन्होंने बिहार के शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो सुधार का सपना देखा वह आज भी स्मरणीय है। उन्होंने समाज के हाशिए के लोगों को सम्मान के साथ जीने के प्रेरित किया।

चौधरी ने कहा कि बिहार में पिछड़े वर्गों के लिए गठित मुंगेरीलाल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 1978 में कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था की। कर्पूरी जी के बदौलत ही लालू यादव  नेता बने। उन्होंने कहा कि लालू यादव जिन अतिपिछड़ों को कभी अपना ‘जिन्न’ बताया करते थे वहीं अतिपिछड़ा समाज आज राजद से पूरी तरह से अलग हो चुका है और अतिपिछड़ों के बेटे नरेंद्र मोदी के हाथों को मजबूत करने में लगा है।

चौधरी ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों को आत्मसात कर आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  अतिपिछड़ों के हित में कई बड़े फैसले लिए। नतीजन 2014 और 2019 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में अति पिछड़ा समाज की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि 2020 के बिहार विधान सभा चुनाव में भी अतिपिछड़ा समाज ने एकजुट होकर एनडीए के पक्ष में वोट करने का काम किया जिसके बाद बिहार विधान सभा में जीत कर आए कुल 32 अतिपिछड़ा सदस्यों में से 14 अकेले भाजपा के हैं। यह दर्शाता है कि आज भी अति पिछड़ा वर्ग पूरी तरह से भाजपा के साथ है।


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