कलयुग के दानवीर के रूप में जाने जाते हैं गया के संजय चंद्रवंशी, गरीबों की सेवा के लिए बेच दी पुश्तैनी मकान

कलयुग के दानवीर के रूप में जाने जाते हैं गया के संजय चंद्रवंशी, गरीबों की सेवा के लिए बेच दी पुश्तैनी मकान

GAYA : देश के इतिहास में कई ऐसी कहानियाँ सुनी और कहीं जाती है। जिसमें गरीबों और जरुरतमंदों के लिए लोगों ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। आज भी ऐसे लोग इस देश में आसानी से मिल जाते हैं। आज भी इस तरह के इंसान से मिलना हैं तो इसके लिए आपको भारत की भूमि पर गयाजी आना पड़ेगा। गया के जीबी रोड स्थित एक छोटी सी चाय की दुकान पर पहुंचते ही इंसानियत का एहसास होने लगेगा। हम बात कर रहे हैं एक ऐसे शख्स की। जिसने अपनी पूरी जिंदगी परमार्थ के लिए लगा दी। स्वयं के लिए तो पूरी दुनिया जीती है। लेकिन दूसरों के लिए कुछ एक ही लोग होते हैं। उन कुछ एक ही लोगों में गया का संजय चंद्रवंशी है, जिन्होंने  हंसते हंसते गरीबों की सेवा में अपने घर तक को गिरवी रख दिया। 


इतना ही नहीं जिस महाजन से संजय चंद्रवंशी ने पैसे लिए थे। उसके पैसे चुकाने के लिए अपने इकलौता गाड़ी कमाई और ईमानदारी की निशानी घर को उसी महाजन के हाथों सौंप दिया। इसके बाद भी इंसानियत की प्रतिमूर्ति बने संजय चंद्रवंशी ना सिर्फ स्वयं बल्कि अपने परदादा झंडू राम, पिता बनवारी राम और स्वयं संजय चंद्रवंशी के साथ-साथ उसका पुत्र गौतम चंद्रवंशी पत्नी अनीता देवी सभी मिलकर इंसानियत की नैया को आज भी बखूबी पार लगा रहे हैं। दो बेटियों और एक बेटे के साथ धर्मपत्नी और स्वयं संजय 5 लोगों का परिवार बिहार के गया में मिसाल बनकर कायम है। इनकी छोटी से चाय की दुकान पर गरीबों की भीड़ जमा रहती है। जिन्हें संजय अपने बेटे के साथ मुफ्त में चाय पिलाते हैं, वह भी बिस्किट के साथ। यहीं नहीं मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को बुलाकर भी संजय उनका रूप बदल देते हैं। जाड़े के दिनों में गरीबों के लिए कम्बल के लेकर उन्हें गर्मी देने के लिए अलाव का इंतजाम करते हैं। संजय बताते है की गरीबों की सेवा के लिए उन्हें किडनी बेचने की जरुरत पड़ी तो निःसंकोच बेच देंगे। उन्होंने कहा की छोटी सी कमाई में उन्हें किसी चीज की कमी नहीं है। गरीबों की सेवा के उन्हें ख़ुशी मिलती हैं। यहीं नहीं उनकी पत्नी गरीबों के लिए खाना बनाकर खिलाती है। बी.कॉम में पढनेवाले बेटा खुद गरीबों को चाय पिलाता है। 

 

दरअसल संजय चंद्रवंशी का जन्म गया जिला के अति उग्रवाद नक्सल प्रभावित क्षेत्र इमामगंज प्रखंड के केंदुआ गांव में हुआ था। तब संजय चंद्रवंशी के परदादा झंडू राम और दादा श्री राम के अलावे पिता बनवारी राम अपने पिछले तीन पुश्तों से इंसानियत की मिसाल पेश करते रहे हैं। इसी कड़ी का निर्वहन करते हुए संजय चंद्रवंशी और उनका पुत्र गौतम चंद्रवंशी परंपरा को कायम रखे हुए हैं। पांच पुश्तों से दानवीर कर्ण की तरह जीवन व्यतीत करने वाले संजय चंद्रवंशी आज भी विकट परिस्थितियों में डिगा नहीं है। अटल और अदम्य साहस के साथ दानवीरता की मिसाल कायम करने वाले संजय चंद्रवंशी निरंतर अपने ऊपर टूटे दुखों के पहाड़ को चीरता हुआ आगे बढ़ता जा रहा है। 

पिछले 35 वर्षों से इस इतिहास को कायम रखें संजय चंद्रवंशी के जिंदगी का दिनचर्या प्रातः चींटी और खोटो को चीनी देने के साथ शुरू होता है। इसके बाद सड़कों पर पागल विक्षिप्त और बेघर हुए गंदे कपड़ों में लिपटे सचमुच के नारायण की सेवा में जुट जाते हैं। इनकी सेवा को देखकर बड़े-बड़े के हौसले पस्त हो जाते हैं। एक से बढ़कर एक दौलतमंद इनके किस्सों को सुनकर या तो बगले झांकने लगते हैं या फिर दांतों तले उंगलियां दबा देते हैं। जिस प्राणी से इंसान घृणा करता है। उस प्राणी से संजय बेइंतहा मोहब्बत करता है। संजय चंद्रवंशी ने वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान भी मिसाल पेश की। कोरोना काल में बड़े-बड़े लोग टूट चुके थे।  लेकिन संजय चंद्रवंशी का हौसला ज्यों का त्यों बरकरार था। गरीब असहाय लोगों के बीच संजय चंद्रवंशी ने राशन, दवाइयां, वस्त्र के अलावे जीवन उपयोगी सारी वस्तुएं जरूरतमंद लोगों के बीच बांटी। इसी में पूरा परिवार खुश रहता है। 

गया से मनोज की रिपोर्ट

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