डॉ.संजय जायसवाल को बिहार बीजेपी अध्यक्ष बनाकर 'सुशील' और सत्ता के साझीदार को निबटाने की तैयारी में जुट गई भाजपा ? पढ़िए इनसाईड स्टोरी

डॉ.संजय जायसवाल को बिहार बीजेपी अध्यक्ष बनाकर 'सुशील' और सत्ता के साझीदार को निबटाने की तैयारी में जुट गई भाजपा ? पढ़िए इनसाईड स्टोरी

PATNA:  बिहार बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ हीं अध्यक्ष पद के लिए चल रहे सारे कयासों पर विराम लग गया है।संजय जायसवाल नित्यानंद राय की जगह बिहार बीजेपी के नए अध्यक्ष नियुक्त कर दिए गए हैं।लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं से बात करने पर ऐसा लग रहा है कि इस नियुक्ति ने सबको विस्मित कर दिया है।

लेकिन इन सबके बिच बड़ा सवाल यह है  कि केंद्रीय नेतृत्व संजय जायसवाल को अध्यक्ष बनाकर बिहार में क्या  क्या साधना चाहती है ? फिलहाल बिहार बीजेपी सीधे-सीधे नीतीश के नेतृत्व पर दो धडों में बंटता दिखाई दे रहा हो...। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के द्वारा लगातार सुशील मोदी पर निशाना साधा जा रहा है..जब से उन्होंने नीतीश को कप्तान घोषित करने वाला ट्वीट किया है। बयान के घमासान के बीच काफी सोच समझकर संजय जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष का कमान सौंप देने के पीछे कुछ न कुछ माजरा तो जरूर है....या एक बार फिर इसे सुशिल मोदी खेमे की कामयाबी मान ली जाय .

तो क्या सुशील मोदी के खेमे ने बाजी मार ली?

बता दें कि संजय जायसवाल के पिता मदन जायसवाल का जनसंघ से पुराना रिश्ता रहा है।संजय जायसवाल खुद 2009 से लगातार बेतिया से सांसद हैं. कहा जाता रहा है कि इनका सुशील मोदी से करीबी रिश्ता रहा है और उन्हीं के वर्ग से आते हैं।..तो क्या मान लिया जाय की एक बार फिर सुशील मोदी के खेमे ने बाजी मार ली..।इसे समझना होगा, जानकारों की माने तो ,इस बार कुछ वैसा नहीं है,केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नित्यानंद राय के बाद संजय जायसवाल को अध्यक्ष बनाकर सबसे पहले बीजेपी यह साबित करना चाहती है कि बीजेपी सिर्फ सवर्णों की पार्टी नहीं है।यानि लगातार दूसरी बार पिछड़े के हाथ में प्रदेश का कमान देकर केन्द्रीय नेतृत्व  पार्टी को सवर्णो के ठप्पे से मुक्ति दिलाना चाहती है.

सत्ता के साझीदार को भी दे दिया मैसेज

  संजय जायसवाल को बतौर प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का सीधा मतलब बिहार में अपने सत्ता के साझीदार को साफ़ साफ़ सन्देश देना भी  है । जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार में बीजेपी के सत्ता के सहयोगी जेडीयू की। जरा याद कीजिए कैसे लोकसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे में पिछड़ों की पार्टी होने में जेडीयू ने बाजी मार ली थी जब 17 टिकट में से 16 पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को दे दिया था.और दूसरी तरफ  बड़े हीं तरीके से अपरोक्ष तौर पर भाजपा पर सवर्णो की पार्टी होने का राजनीतिक ठप्पा लग गया था।

वहीं संजय जायसवाल के अध्यक्ष बनने के बाद बिहार बीजेपी की अहम रणनीति होगी कि विधानसभा के आनेवाले चुनाव  में सवर्णो और पिछड़ों के बीच संतुलन कायम करते हुए जेडीयू को औकात में कैसे लाया जाय . बेशक पिछड़ों के सहारे चुनावी राजनीत करने वाली जेडीयू के लिए अपनी रणनीति पर दूबारा विचार करना होगा।या फिर नितीश कुमार को भी सवर्णों और पिछड़ों सहित अल्पसंख्यकों के बिच संतुलन साधना होगा .

तो क्या वैश्य से वैश्य चेहरा को खत्म करने की है तैयारी ?

अब बात कर लेते हैं सुशील मोदी की.....संजय जायसवाल का अध्यक्ष के तौर पर नाम सुनते ही कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया कि मोदी खेमे ने फिर से बाजी मार ली।लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो संजय जायसवाल को अध्यक्ष बनाकर सुशील मोदी को हीं साधने की तैयारी कर ली गई है।सर्वविदित है कि वर्तमान में सुशील मोदी बिहार बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे के तौर परढाई दशकों से स्थापित नेता हैं.लेकिन वर्तमान परिस्थितिओं में सुशिल मोदी का दिल्ली के लोगों से दिल नहीं मिल रहा।उसका परिणाम भी लगातार देखने को मिल रहा है। सबने देखा की कैसे  सुशील मोदी जैसा कद्दावर नेता कुछ ट्वीट करता हो और उसके तत्काल बाद उनके ही मातहत नेताओं के द्वारा उनकी औकात बताने का खेल शुरू हो जाता है. सुशिल मोदी की बातों को उन्ही के मातहत नेता खारिज करता हो यह सुशिल मोदी सहित उनके समर्थकों के लिय भी एक सन्देश है ,.यह बात ,बिहार के मोदी और उनके समर्थकों को  समझना होगा.की कैसे.सुशील मोदी के राजनीतिक आभा मंडल को धूमिल करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है।

 अब जरा दिल्ली दरबार के विचार पर गौर कीजिय. आखिर  सुशील मोदी के हीं वर्ग के एक तेज तर्रार और काबिल नेता को प्रदेश अध्यक्ष का कमान क्यूँ दिया गया .दिल्ली ने   अपनी मंशा जाहिर कर दी है.अब इस मंशा को बिहार के मोदी कितना समझ पाय्ते हैं यह उन पर निर्भर करता है . अब साफ़ हो चूका है की  किसी एक का वर्चस्व का दिन लदने वाला है।गौरतलब है कि बीजेपी को वैश्यों की पार्टी भी कहा जाता रहा है। बिहार में वैश्य नेता के तौर पर सुशील मोदी की एक अलग पहचान है।संजय जायसवाल का अध्यक्ष बनना या फिर बनाया जाना कहीं बिहारी मोदी की पहचान छीनने की कवायद तो नहीं? 

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