संजय जायसवाल ने ब्लॉग लिखकर 'बुद्धिजीवी गैंग’ पर साधा निशाना, बोले- धारा 370 हटाने के विरोधी लोगों को पहचानने की है जरुरत

संजय जायसवाल ने ब्लॉग लिखकर 'बुद्धिजीवी गैंग’ पर साधा निशाना, बोले- धारा 370 हटाने के विरोधी लोगों को पहचानने की है जरुरत

PATNA: बिहार बीजेपी के अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने ब्लॉग लिखकर देश के तथाकथित बुद्धिजीवी गैंग पर निशाना साधा है। संजय जायसवाल ने कहा कि धारा370को लेकर आज देश में एक नयी वैचारिक बहस छिड़ी हुई है. एक तरफ देश की अधिकांश जनता जहां मोदी सरकार के इस साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय की दिल खोल करते नहीं थक रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इससे लोकतंत्र पर हमला, तानाशाही और न जाने क्या क्या बताते हुए इस निर्णय के विरोध में देश से विदेश तक अपनी छाती कूट रहे हैं. ऐसे में लोगों के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर यह कौन लोग हैं जो खुद को बुद्धि और ज्ञान का ठेकेदार समझे बैठे हैं? आखिर क्यों यह लोग मोदी राज में लिए गये हरेक निर्णय की आलोचना करने को ही अपना धर्म और कर्म दोनो मान चुके हैं? यहाँ तक कि इन्हें इस बात से भी फर्क नही पड़ता कि इनके खोखले बयानों से पिछले पांच सालों में बनी देश की छवि पर भी आंच आ सकती है. इन्हें इसकी भी कोई परवाह नही है कि पाकिस्तान इनके बयानों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है, बल्कि याद करें तो चंद दिनों पहले इन्ही में से कुछ मीडिया से संबंधित नामचीन लोग ढंके छिपे तरीके से पाकिस्तान को भारत पर पुलवामा तरीके का हमला करने की सलाह देते भी नजर आए थे. दरअसल फाइव स्टारी संस्कृति में पले-बढे इन खाए-पिए और अघाए तबके को भूरे अंग्रेजों की उपाधि दे दी जाए तो अतिश्योक्ति न होगी. खुद को आम हिन्दुस्तानियों से श्रेष्ठ समझने का दंभ पाले यह लोग एक लंबे से यह मानते आयें हैं कि आम लोगों को इनके हिसाब से ही चलना चाहिए और अगर कोई इनसे इतर अपनी लकीर खींचना चाहे तो उसे फासिस्ट, नाजीवादी, तानाशाह और न जाने कौन कौन सी आम जनता के लिए पूरी तरह अबूझ उपमाओं से नवाज दिया जाता है. इनके लिए इनका कहा वाक्य ही लोकतंत्र है और इनके लिखे हर्फ ही संविधान है.

शानदार एसी कमरे में बैठ कर अपने लखटकिया मैकबुक और आईफ़ोन-X से यह लोग देश के जन-गण का मन पढ़ लेने का दावा करते हैं.2014से पहले सत्ता के गलियारों में इनकी तूती बोलती थी. राडिया प्रकरण याद करें तो यही जमात तय करती थी कि कौन मंत्री बनेगा और किसे मंत्रिमंडल से बाहर किया जाना चाहिए. लेकिन2014के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया. प्रधानमन्त्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र प्रथम की अवधारणा में विश्वास करने वाली सरकार आयी, जिसका आना इनके लिए किसी आघात से कम नही था. इन ‘साहब बहादुरों’को इस बात की बेचैनी हो गयी कि आखिर प्रधानमन्त्री मोदी के खिलाफ लंबे अरसे तक किए गये इनके दुष्प्रचार को हिंदुस्तान की आम अवाम ने नकारने की हिम्मत कैसे की. आखिर कैसे एक ‘कुलीन’और ‘शाही’खानदान के युवराज को छोड़, लोगों ने एक गरीब और अतिपिछड़े परिवार के चाय बेचने वाले को दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत का सिरमौर बना दिया. तब इन्होने देश में असहिष्णुता का एक नया राग छेड़ा, लोकतंत्र को खतरे में बताया, नोटबंदी पर विधवा विलाप करते हुए अपनी छाती कुटी. पूरे पांच वर्ष तक यह गिरोह केंद्र सरकार के खिलाफ प्रपंचो में व्यस्त रहा. यह पूरे देश में ‘डर का माहौल’बताते रहे, लेकिन इनके दुर्भाग्य से जनता इनका खेल समझ चुकी थी,इसीलिए2019में पहले से भी बड़े बहुमत के साथ मोदी सरकार को दुबारा जीता कर सदन में भेजा.

अब मोदी2.0में इस गिरोह की नींदें हराम हो चुकी है. धारा370हटने के बाद इन लोगों की बौखलाहट इनके बयानों से साफ़ दिखाई देती है. यह बताते हैं कि बिना कश्मीर के लोगों से पूछे हुए केंद्र सरकार ने धारा370हटा कर वहां के निवासियों के साथ ज्यादती की है, लेकिन यह पूछने पर कि क्या वहां यह धारा देश के लोगों से पूछकर लगायी गयी थी, यह तबका दुसरे ही पल आपको फासीवादी करार दे देगा. अपने ही देश में रिफ्यूजी बने बैठे कश्मीरी पंडितों को वहां फिर से बसाने की बात सुनते हीं इनका मुंह कसैला हो जाता है. यह पूछने पर कि जब कश्मीर में देश के बाहर से, अवैध रूप से रोहिंग्या आ कर बस सकते हैं तो फिर वहां के मूल निवासी कश्मीरी पंडित क्यों नही, इनका हाजमा खराब होने लगता है और यह आपको अल्पसंख्यक विरोधी, भगवा आतंकी और न जाने क्या क्या बताने लगते हैं. यहाँ तक कि खुद को दलितों के सबसे बड़े हमदर्द बताने वाले इन लोगों का खूनइस धारा की वजह से कश्मीर में रहने वाले दलितों-पिछड़ों को आरक्षण नही मिलने की बात पर भी नही खौलता. जबकि यह एक तथ्य है कि इस धारा की वजह से आजादी के बाद पाकिस्तान से आकर कश्मीर में बसे वाल्मीकि समुदाय के भाई-बहनों को गंदगी साफ़ करने के अलावा कोई और काम करने की मनाही थी.

कश्मीर के आंतरिक लोकतंत्र को भी इस धारा ने तगड़ा नुकसान पंहुचाया था, इसके कारण वहां पंचायत चुनाव भी नही हो पाते थे. ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या यह ‘कुलीन नामदार विद्वान’इन हकीकतों से अंजान हैं? जवाब है बिलकुल नही, इन्हें सब पता है लेकिन उसे स्वीकारना इन्हें नागवार गुजरता है. इसके अलावा साफ़ शब्दों में कहें तो यह पूरा खेल भ्रष्टाचार और उससे होने वाली अकूत कमाई का है. मोदी राज में देश के इन भ्रष्ट तत्वों के पेट पर पड़ी लात किसी से छिपी नही है. लोगों को पता है कि इनकी बिलबिलाहट की असली वजह क्या है. बहरहाल मोदी सरकार यह जानती है कि जनता उसके साथ पूरी शिद्दत से खड़ी है. धारा हटाने के बाद सरकार ने कश्मीर के विकास के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, जिसके सुखद परिणाम जल्द ही दिखाई देंगें.

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