राम पर सवाल उठानेवाले शिक्षा मंत्री को लेकर संजय जायसवाल ने कह दी बड़ी बात - जब दुनिया से उठेंगे तो 'राम नाम सत्य ही बोला जाएगा' लिख लें

राम पर सवाल उठानेवाले शिक्षा मंत्री को लेकर संजय जायसवाल ने कह दी बड़ी बात - जब दुनिया से उठेंगे तो 'राम नाम सत्य ही बोला जाएगा' लिख लें

NEW DELHI : बिहार में नीतीश सरकार कोई उद्योग  स्थापित नहीं कर पाई, रोजगार नहीं दे पाई, इसलिए अपने मंत्रियों ने नीतीश कुमार कभी रामचरित मानस और कभी सेना के शौर्य पर ओछी टिप्पणी करवा रहे हैं। ताकि बिहार के लोगों का ध्यान जरूरी मुद्दों से हटाया जा सके। यह कहना है भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जाएसवाल की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस राम के नाम पर वह सवाल उठा रहे हैं. वह भी जब दुनिया से जाएंगे तो राम नाम सत्य ही बोला जाएगा।

नई दिल्ली पहुंचे बेतिया सांसद ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के समर्थन में इस तरह की बयानबाजी की जा रही है। कभी उनके शिक्षा मंत्री रामचरित मानस पर विवादित बयान देते हैं. कभी सहकारिता मंत्री सेना के शौर्य पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपमानित कर रहे हैं। यह सब अचानक नहीं हुआ है।   अन्यथा नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में छात्रों के बेहतर शिक्षार और उनके रोजगार पर चर्चा करने की जगह वह रामचरित मानस की एक लाइन को लेकर पूरे हिंदू समाज को अपमानित करने की हिम्मत नहीं करते और बिहार के माहौल को खराब करते हैं।

गया का हर खोमचे वाला भी जानता है सुरेंद्र यादव के कारनामे

संजय जायसवाल ने कहा कि नीतीश जी के सहकारिता मंत्री सुरेंद्र यादव कहते हैं कि चुनाव से पहले से फिर कोई हमला होगा। यह पूरी तरह से सेना की काबिलियत पर सवाल उठाना है। उन्होंने इस बयान को लेकर सुरेंद्र यादव की समझ पर ही सवाल उठा दिया। सुरेंद्र यादव कौन हैं और किस तरह के 1990 से 2005 के बीच में वह करते रहे हैं, उसके बारे में गया जिले के खोमचे वाले से लेकर ठेलावाला भी जानता है। सहकारिता मंत्री बनने के बाद उन्होंने विभाग में क्या काम किए, इस पर वह बात नहीं करते हैं। आज बिहार में किसान अपना धान बेच नहीं पा रहा है। पैक्सों की हालत खराब है। उनके विभाग की नाकामी के कारण अब नीतीश कुमार जीविका दीदियों को धान खरीदी के लिए कह रहे हैं। 

जवाब देने से बचना चाहती है सरकार

संजय जायसवाल ने कहा कि यह बयानबाजी राजद कोटे के मंत्री कर रहे हैं। ताकि उनसे कोई यह न पूछे कि दस लाख नौकरियां कहां है। परीक्षा के अभ्यर्थियों को पांच हजार देने का वादा किया था। किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया।  इन सवालों का जवाब नहीं देता पड़े, इसलिए बार बार ओछी बयानबाजी कराई जा रही है।

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