संजय जायसवाल बोले- बिहार में राजद ने कांग्रेस का किया बेड़ा गर्क, साथ छोड़ना आसान नहीं

संजय जायसवाल बोले- बिहार में राजद ने कांग्रेस का किया बेड़ा गर्क, साथ छोड़ना आसान नहीं

पटना. बिहार के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कांग्रेस के चिंतन शिविर पर निशाना साध है। उन्होंने गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा। इसमें उन्होंने लिखा है कि यह कांग्रेस नेताओं का चिंतन शिविर नहीं है, बल्की कांग्रेस पर गांधी परिवार को पकड़ बनाने के लिए कांग्रेस नेताओं का संकल्प दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने इसको लेकर राजद पर भी निशान साधा है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है कि बिहार में राजद की वजह से कांग्रेस कमजोर हो गयी। स्थिति यह हो गयी कि कांग्रेस पूरी तरह से राजद पर निर्भर हो गयी।

संजय जायसवला का फेसबुक पोस्ट

'चिंतन शिविर में बिहार कांग्रेस के नेताओं द्वारा राजद का साथ छोड़ने की उठायी मांग पर टिप्पणी करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने आज फेसबुक के जरिए लिखा कि कांग्रेस के तथाकथित ‘चिंतन शिविर’ में जो कुछ भी हुआ, उससे राजनीति में रूचि रखने वाले लोग पूर्व से ही परिचित थे। लोग पहले से ही जान रहे थे कि यह ‘चिंतन’ पार्टी पर परिवार की पकड़ मजबूत बनाए रखने और परिवार के प्रति वफ़ादारी के ‘संकल्प’ को बनाए रखने तक ही सीमित रहने वाला है। लेकिन बिहार कांग्रेस के नेताओं का रवैया आश्चर्यजनक रहा है। खबरों के मुताबिक परिवार के समक्ष पहली बार हिम्मत दिखाते हुए बिहार कांग्रेस के नेताओं ने राजद का साथ हर हाल में छोड़ने की सिफारिश की है।

उन्होंने लिखा कि हालांकि बिहार कांग्रेस के नेता भी जानते हैं कि जब तक गांधी परिवार की मुहर न लगे वह चाह कर भी पार्टी को उठाने के लिए कुछ नहीं कर सकते। दरअसल कांग्रेस की यही विवशता कांग्रेस के पतन का कारण है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने लिखा कि जिस प्रकार प्राचीन काल में दो राज परिवारों के बीच होने वाली संधियों में परिवार के ख़ास सलाहकारों के अतिरिक्त किसी अन्य की राय का कोई महत्व नहीं हुआ करता था। राजद-कांग्रेस के रिश्ते में भी कुछ वैसा ही है, लेकिन अपने नेताओं के मुखर होने के कारण जहां राजद लगातार मजबूत होती गयी। वहीं ‘परिवार’ के हवा-हवाई  फैसलों के कारण कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व पूरी तरह से नष्ट, भ्रष्ट और ध्वस्त हो गया। स्थिति यह हो गयी कि कांग्रेस पूरी तरह से राजद पर निर्भर हो गयी। लोग यहां तक बताते हैं कि कांग्रेस के नेता पद या टिकट के लिए अपने नेताओं से पैरवी करने के बजाए राजद के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। नतीजा यह हुआ कि लंबे समय तक अर्श पर रही कांग्रेस फर्श पर बिखर गयी।

उन्होंने लिखा कि अब सब कुछ लुटा-पीटा कर होश में आने से कांग्रेसियों को कितना फायदा होगा यह तो वक्त ही बतायेगा, लेकिन इतना तय है कि यदि बिहार कांग्रेस की यह सिफारिश निर्णय का रूप लेती है तो इससे इनकी पार्टी में एक ज़ोरदार भगदड़ मचनी तय है। लोगों की माने तो बिहार कांग्रेस में राजद के लोग चोला बदल कर बड़ी संख्या में शामिल हैं और उनमें से कई तो अच्छे पदों पर आसीन हैं। भले ही कुछ लोग राजद से नाता तोड़ने के पक्ष में हों, लेकिन इस निर्णय के विरुद्ध खड़े होने वालों की संख्या भी कम नहीं होने वाली है।

डॉ. जायसवाल ने लिखा कि बहरहाल चुनौतियों से पार पाने वाले ही विजय श्री का वरण करते हैं। लोकतंत्र की मजबूती के लिए दमदार विपक्ष होना भी जरूरी है। बिहार कांग्रेस यदि पुनर्जीवित होने के लिए राजद का ‘हाथ’ छोड़ती है तो इस चिंतन शिविर के कुछ सार्थक परिणाम जनता को देखने को मिलेंगे।'

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