केंद्र के कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते नजर आये भाजपा सांसद, पढ़िए पूरी खबर

केंद्र के कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते नजर आये भाजपा सांसद, पढ़िए पूरी खबर

KAIMUR : कैमूर जिले में किसान बिल को लेकर जनसंपर्क करने पहुंचे औरंगाबाद के बीजेपी सांसद सुशील सिंह ने प्रधानमंत्री के नियमों का धज्जियां उड़ा रहे हैं. बता दें कि देश के प्रधानमंत्री कोविड-19 के नियमों का पालन करने के लिए देश के जनता से लगातार अपील कर रहे हैं. वहीं बिहार में माक्स नहीं लगाने पर लोगों से जुर्माना वसूला जा रहा है. लेकिन गौर करने की बात यह है कि नियम बनाने वाले सत्ताधारी नेता ही नियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं. यह कोई पहला मामला नहीं है. बिहार के कैमूर में जब लाक डाउन था तो कृषि मंत्री प्रेम कुमार भी लॉक डाउन का उल्लंघन कर मुंह पर बैगर माक्स लगाना भूल गए और जनता के बीच चले .गए बीजेपी के नेता, सांसद, विधायक एवं कार्यकर्ता और मंत्री के लिए प्रधानमंत्री के अपील का कोई असर नहीं केवल यह नियम   बिहार की जनता के लिए बनाई गई है नेताओं के लिए नहीं. 

आज औरंगाबाद सांसद सुशील सिंह जनसंपर्क तथा प्रेस वार्ता में मास्क लगाए हुए नहीं दिखे. जबकि उनके कार्यकर्ता मास्क लगाए थे. सांसद सुनील सिंह प्रेस वार्ता में बताया कि किसान बिल किसानों के हित के लिए सरकार लाई है. विपक्ष के लोग इस बिल को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे है. जिससे लोग समझ नहीं पा रहे हैं. क्या सही है और क्या गलत है. किसानों के बंधनों को मुक्त कर दिया गया है. 


सरकार किसान अपनी उपज को किसी भी मंडी में ले जाकर आसानी से बेच सकते हैं. उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा. विपक्षी दल के किसान बिल के विरोध पर उन्होंने बताया जो विरोध कर रहा. है वह अपने व्यक्तिगत कारणों से विरोध कर रहा है. जिन राज्य में विरोध हो रहे हैं. उस राज्य के बड़े नेता जिनके कब्जे में पूरा वहां का मंडी है. वैसे लोग को व्यक्तिगत नुकसान है. वैसे लोग इस को सहन नहीं कर पा रहे हैं. इसलिए वहां विरोध हो रहा है.

 पूछे जाने पर सांसद ने चुनाव के विषय में बताया कि हम लोग विकास के मुद्दों पर लड़ने जा रहे हैं. सरकार ने चौमुखी विकास किया है. पिछले 15 साल की तुलना में इस 15 साल को देखा जा सकता है और सबके सामने विकास दिखाई दे रहा है. जब सांसद से बिहार के विशेष राज्य की दर्जा पर पूछा गया तो उन्होंने कहा की उसके लिए क्राइटेरिया बना है. इससे पूरा करना राज्य का दायित्व है. जब वह क्राइटेरिया पूरा हो जाएगा तो विशेष राज्य का दर्जा खुद मिल जाएगा. नियम सबके लिए एक है. कोई भी राज्य हो मांगने के लिए तो कोई भी कुछ भी मांग सकता है. लेकिन देने से पहले नियमों को देखना जरूरी है. 

कैमूर से देवब्रत की रिपोर्ट 


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