तीन दिन में एक माह की नोटिस पर काम से निकालने का फैसला वापस, अब रिटायरमेंट तक नौकरी कर सकेंगे संविदाकर्मी

तीन दिन में एक माह की नोटिस पर काम से निकालने का फैसला वापस, अब रिटायरमेंट तक नौकरी कर सकेंगे संविदाकर्मी

पटना। तीन दिन पहले संविदाकर्मियों को सरकारी सेवक नहीं मानने और एक माह की नोटिस पर कभी भी नौकरी से निकाले जाने का फैसला सुनानीवाली बिहार सरकार ने अपने कदम पीछे खिंच लिए हैं। सरकार ने अपने नए गाइडलाइन में सुधार करते हुए एक माह की नोटिस पर काम से निकाले जाने का फैसला वापस ले लिया है, साथ ही यह नियम बनाया है कि रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं होती है, तो उस पद पर काम करनेवाला रिटायरमेंट तक काम कर सकता है।  मामले में  प्रशासन की तरफ से जारी गाइडलाइन पर अब बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने सफाई दी है। विभाग ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि राज्य में संविदा कर्मियों के लिए एक साल की सेवा की सीमा पहले से तय थी। अब संविदा कर्मियों को राज्य सरकार ने नियमित नियुक्ति में वेटेज देने की सुविधा दी है। इस फैसले से संविदा कर्मियों को सरकारी सेवा में लाभ मिलेगा।

सामान्य प्रशासन विभाग ने संविदा कर्मियों के संबंध में सही तथ्यों से अवगत कराने का दावा किया है। इसमें संविदा पर नियोजित कर्मियों को पूर्व से मिल रही किसी सुविधा में कोई कटौती नहीं करने की बात कही गई है। पूर्व से संविदा पर नियोजित कर्मियों के साथ-साथ भविष्य में नियोजित होने वाले ऐसे कर्मियों को भी और कई बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। विभिन्न प्रकार के अवकाश, प्रत्येक वर्ष मानदेय का पुनरीक्षण, अनुग्रह अनुदान, यात्रा व्यय, सभी विभागों में नियमित नियुक्ति में वेटेज आदि सुविधाएं भी अब उपलब्ध होंगी।

सरकार के फैसले पर उठे थे सवाल

एक माह की नोटिस पर काम से हटाने को लेकर राज्य सरकार को लेकर विपक्ष सहित कई संगठनों ने सवाल उठाया था। चूंकि पूर्व में नीतीश कुमार ने संविदाकर्मियों को नियमित करने की बात कही थी। ऐसे में उन पर अपनी ही बात से मुकरने का आरोप लग रहा था।  मीडिया में ऐसी ख़बरें आई थीं कि नीतीश सरकार एक महीने का नोटिस या मानदेय देकर संविदा पर बहाल कर्मचारी की सेवा समाप्त कर सकती है। इस पर जमकर बवाल और राजनीतिक हमले होने से नीतीश सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए।


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