सारण के 400 सरकारी हेडमास्टरों की कार्यशैली संदिग्ध, कई आदेश के बावजूद भी नहीं लौटाया योजनाओं का रूपया

सारण के 400 सरकारी हेडमास्टरों की कार्यशैली संदिग्ध, कई आदेश के बावजूद भी नहीं लौटाया योजनाओं का रूपया

CHHAPRA : कोविड-19 के दौरान ही शिक्षा विभाग ने सारी स्कूली योजनाओं को अप टू डेट करने व विभिन्न प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए सभी सरकारी स्कूलों के हेडमास्टरों को विभिन्न मदों में बचे रूपये को खाता क्लोज करते हुए लौटाने का आदेश दिया। लेकिन कई आदेश के बावजूद जिले के 3000 सरकारी स्कूलों में से 400 स्कूलों के हेडमास्टरों ने रूपया नहीं लौटाया है। इतना ही नहीं खाता भी क्लोज नहीं किया है। ऐसे में विभाग इन हेडमास्टरों के खिलाफ राशि के हेर-फेर कर लेने के नजरिये से देख रहा है। इसीलिए इन्हें संदिग्ध भी माना जा रहा है। डीईओ व डीपीओ ने सभी बीईओ के साथ बैठक कर अब कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे सभी हेडमास्टरों का वेतन 22 जुलाई के बाद बंद कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं विभागीय कार्रवाई भी होगी।

विभाग को शक, कहीं पहले की तरह गड़बड़ी तो नहीं हो रही

क्योंकि ऐसे पहले कई उदाहरण मिले हैं जब हेडमास्टरों को विभिन्न स्कूली योजनाओं के लिए रूपये मिलते थे और वे सरकारी खाते में से रूपया निकालकर निजी कार्य में खर्च कर देते थे। यही कारण है कि अभी तक 2003 से लेकर 2015 तक की कई बड़ी योजनाएं अटकी पड़ी है और करोड़ो रुपये का हिसाब विभाग को नहीं मिल रहा है। उस समय जब जांच हुई थी तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए थे। इनमें किसी हेडमास्टर ने भवन निर्माण के पैसे से जमीन खरीद लिया था तो किसी ने स्कॉर्पियों व अन्य संपत्ति खरीद ली थी। ऐसे में  इस बार भी विभाग को शक है कि आखिर में आदेश के एक माह बाद भी 400 स्कूलों द्वारा रिपोर्ट क्यों नहीं दी जा रही है।

किस कारण से नहीं दिया अब तक रिपोर्ट, शोकॉज

कार्रवाई के प्रथम चरण के तहत हेडमास्टरों से यह पूछा जाएगा कि आखिर में रिपोर्ट नहीं देने व राशि नहीं लौटाने का कारण क्या है? साक्ष्य सहित जवाब दें। इसके बाद यदि संतोषपूर्ण जवाब 22 तक नहीं मिला तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी। यह भी संभव है कि कइ सस्पेंड होंगे। डीईओ अजय कुमार सिंह और डीपीओ राजन गिरि ने बताया कि हेडमास्टरों को 22 तक का मौका है, वे चाहें तो रिपोर्ट दे दें।

छपरा से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट

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