इलेक्टोरल बॉन्ड पर SC का फैसला, राजनीतिक दलों को बताना होगा किसने दिया चंदा

इलेक्टोरल बॉन्ड पर SC का फैसला, राजनीतिक दलों को बताना होगा किसने दिया चंदा

NEWS4NATION DESK : इलेक्टोरल बॉन्ड पर आज शुक्रवार को सुप्रीम  कोर्ट का फैसला आ गया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सभी राजनीतिक दलों को बताना होगा कि आखिर चंदा कहां से और किस मोड में मिल रहा है। वहीं अदालत ने सभी राजनीतिक पार्टियों को 15 मार्च तक मिले इलेक्टोरल बॉन्ड्स की सारी डिटेल चुनाव आयोग को 30 मई के अंदर बंद लिफाफे में सौंपेने का आदेश दिया है।
 
 हालांकि सरकार के लिए एक राहत वाली बात यह है कि अदालत ने अपने फैसले में चुनावी बॉन्ड पर कोई रोक नहीं लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनावी बॉन्ड को लेकर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है।
 
 इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर केन्द्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने वकालत की थी। कोर्ट के समक्ष उन्होंने कह था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर कोर्ट आदेश न पारित करे। केंद्र ने आग्रह किया था कि कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया के पूरा होने के बाद इस मुद्दे पर फैसला लेना चाहिए।

बता दें कि चुनावी बॉन्ड योजना को अंग्रेजी में 'इलेक्ट्रल बॉन्ड्स स्कीम' (electoral bond scheme) नाम से जाना जाता है। ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से मिलेंगे। जिन 29 शाखाओं से बॉन्डस खरीदे जा सकते हैं, उनमें नई दिल्ली, गांधीनगर, चंडीगढ़, बैंगलोर, भोपाल, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, चेन्नई, कलकत्ता और गुवाहाटी शहर शामिल हैं। इन बॉन्ड्स को भारत का कोई भी नागरिक, कंपनी या संस्था चुनावी चंदे के लिए खरीद सकेंगे। ये बॉन्ड एक हजार, दस हजार, एक लाख और एक करोड़ रुपये तक हो सकते हैं।
 
 वहीं सरकार की ओर से आरबीआई ये बॉन्ड्स जारी करेगा। दान देने वाला बैंक से बॉन्ड खरीदकर किसी भी पार्टी को दे सकता है। फिर राजनीतिक पार्टी अपने खाते में बॉन्ड भुना सकेगी। बॉन्ड से पता नहीं चलेगा कि चंदा किसने दिया।

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