स्कूल और हॉस्पिटल को रखा जाये बंद से मुक्त, आचार्य श्री सुदर्शन महाराज ने की अपील

PATNA : वरिष्ठ शिक्षाविद राज ऋषि आचार्य श्री सुदर्शनजी महाराज ने चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि जहां भी स्कूल चलते हैं उनमें हम सबों के ही बच्चे पढ़ते हैं. बच्चे जब स्कूल आते हैं, तो हम सभी माता-पिता इस आशा में प्रतीक्षारत रहते हैं कि हमारा बच्चा जल्द सकुशल घर आ जाए. लेकिन किसी भी कारण से जब आधा घंटा विलंब होने लगता है तो अपने बच्चों के लिए माताएं व्यग्र हो जाती हैं और जब उन्हें पता चलता है कि किसी जाम में उनका बच्चा भूखे प्यासे फंसा है. अथवा किसी हड़ताल एवं बंदी के कारण स्कूल आते -जाते बच्चे कहीं घिरे हुए हैं, तो प्रत्येक माताओं की सांस फूलने लगती है. 

आचार्य श्री सुदर्शनजी महाराज ने कहा कि प्रजातंत्र में किसी भी दल को विरोध या प्रदर्शन करने का हक है. हम पूरी तरह से इस बात से सहमत हैं, लेकिन हमारा सारा जनतांत्रिक अधिकार तब कराहने लगता है, जब हमें पता चलता है कि हमारा छोटा बेटा या बेटी असहाय अवस्था में सड़क के किसी जाम में फंसा हो. बच्चों को क्या पता कि जाम, हड़ताल या बंदी किस कारण से हो रहा है. वह तो मुस्कुराते हुए घर जाकर अपनी मां से भोजन मांग कर खाना चाहता है. ऐसी स्थिति में अगर बच्चों को यह पता चलता है कि अमुक राजनैतिक कारण से अथवा किसी अनजान सड़क दुर्घटना के कारण सड़क पर फंसा है तो इसका अर्थ वह समझ नहीं पाता. 

पीड़ा तो तब होती है जब बच्चे पूछते हैं “ सर आज स्कूल बंद क्यों है ? ” इस प्रश्न का उत्तर कोई भी अभिभावक बच्चों को कैसे समझाएं कि अमुक कारण से स्कूल बंद है या सड़क जाम है. उन्होंने कहा की सामाजिक संस्थाओं से अनुरोध करता हूं कि किसी भी बंदी से स्कूलों और अस्पतालों को मुक्त रखा जाए. क्योंकि अगर एक दिन भी स्कूल बंद रहता है. अथवा किसी बीमार का इलाज नहीं होता तो आपके ही किसी अपनों का ही नुकसान होता है.

 इसलिए  सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं कि कोई भी हड़ताल या बंदी हो. उसमें सड़क के एक तरफ इमरजेंसी सेवा जैसे स्कूल और हॉस्पिटल के लिए खोल कर रखा जाए. ताकि आपके ही किसी अपने को उचित इलाज दिया जा सके और आपके बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाया जा सके.

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