सीड ने बिहार सरकार से गंभीर प्रदूषण के दिनों में ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ लागू करने की अपील की

सीड ने बिहार सरकार से गंभीर प्रदूषण के दिनों में ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ लागू करने की अपील की

PATNA : गत एक महीने से पटना गहरे ‘स्मॉग’ (smog) यानी ‘प्रदूषित धूलकण एवं धुआं मिश्रित धुंध’ से जूझ रहा है, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (Graded Response Action Plan-GRAP) को लागू करने में विफल रही है. ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (श्रेणीबद्ध जवाबी कार्य योजना) दरअसल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंभीर वायु प्रदूषण से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए तैयार किया गया है. सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) द्वारा बीते नवंबर महीने में 30 दिनों के एयर क्वालिटी संबंधी आंकड़ों का अध्ययन एवं विश्लेषण किया गया, जो यह दर्शाता है कि केवल एक दिन को छोड़ दिया जाए तो राजधानी पटना में वायु गुणवत्ता लगातार ‘खराब’ (poor) से ‘गंभीर’ (severe) श्रेणी के बीच रही है. प्रदूषण स्तर में अचानक होनेवाली वृद्धि को नियंत्रित करने और इसके संपर्क में लोगों को रहने से बचाने के लिए आपात स्थिति में ‘पटना क्लीन एयर एक्शन प्लान’ (Clean Air Action Plan for Patna) के तहत ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ को अधिसूचित किया गया था. वास्तव में ये तात्कालिक और अल्पकालिक नीतिगत उपाय हैं, जो प्रदूषण उत्सर्जन में बढ़ोतरी को नियंत्रित करते हैं और ‘स्मॉग’ के उच्च स्तर पर उठान और इसके संपर्क में आने को रोकते है.  इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में अधिसूचित और लागू की गई ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ के अनुरूप तैयार किया गया है. इस प्लान के तहत कई तरह के उपाय उठाए जाते हैं, जब शहर की आबोहवा में घातक माने जाने वाले प्रदूषित सूक्ष्म धूलकणों यानी पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (PM2.5) का स्तर 121 से लेकर 300+ माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (µg/m3) के बीच दर्ज होता है. इस प्लान के तहत प्रदूषण के अनुसार विभिन्न श्रेणी और स्तरों पर कई कदम उठाए जाते हैं. 

कॉन्फ्रेंस में अपने विचार व्यक्त करते हुए सीड के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रमापति कुमार ने कहा कि ‘‘पटनावासी बिहार सरकार द्वारा शहर के लिए जारी किए गए ‘व्यापक स्वच्छ वायु कार्य योजना’ (Comprehensive Clean Air Action Plan) की सिफारिशों को ईमानदारी और पारदर्शी ढंग से क्रियान्वित करने से कम कुछ और उम्मीद नहीं करते. ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार खुद अपनी सिफारिशों को क्रियान्वित करने में विफल रही है, क्योंकि पटना के लिए क्लीन एयर एक्शन प्लान को जारी किए जाने के तुरंत बाद छह दिनों तक यह शहर ‘गंभीर’ वायु प्रदूषण का गवाह रहा. प्रदूषण के जोखिम भरे उच्च स्तर को ध्यान में रखते हुए पटना में ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ को अविलंब लागू किया जाना चाहिए था. सच्चाई यह है कि पटना में एयर क्वालिटी में सुधार तभी आ सकता है, जब क्लीन एयर एक्शन प्लान में पहले से बताए गए रचनात्मक कदमों को ठोस तरीके से लागू किया जाए. हमें दरअसल इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति की फौरन जरूरत है.’’

सीड में सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति ने गंभीर प्रदूषण वाले दिनों में ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ की जरूरत और अनिवार्यता से अवगत कराया कि ‘जीआरएपी के मानकों के अनुसार, ‘गंभीर प्रदूषण वाले दिनों’ में पटना में सभी कंस्ट्रक्शन संबंधी गतिविधियों समेत ईंट भट्ठा ईकाइयों पर अल्पकालिक प्रतिबंध लगना चाहिए था और अल्पकालिक तौर पर स्कूल और कॉलेजों को बंद कर देना चाहिए था. इसी तरह ‘बहुत खराब वायु प्रदूषण वाले दिनों’ में मालवाही ट्रकों के शहर में आवागमन (केवल अनिवार्य सेवाओं एवं वस्तुओं के आवागमन को छोड़ कर), डीजल जेनरेटर सेट के इस्तेमाल, होटल-ढाबों तथा खुले में कोयले के जलावन पर प्रतिबंध लगाया जाना सुनिश्चित होता. लेकिन प्रतीत होता है कि ऐसा नहीं किया गया.’’ उन्होंने आगे बताया कि ‘‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में इसी तरह की परिस्थितियों में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों, हॉट-मिक्सिंग प्लांट्स और जीवाश्म ईंधन आधारित सभी उद्योगों पर अल्पकालिक पाबंदी सुनिश्चित की गई थी.  यहां तक कि आज भी जब दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता थोड़ी सुधरी है, कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना जारी रहा है.’’ 

जाड़े के मौसम में पटना निरंतर गंभीर स्तर का प्रदूषण स्तर से जूझता रहा है, जिसके पीछे विपरीत मौसमी परिस्थितियां भी जिम्मेवार हो सकती हैं. वैसे विपरीत मौसम संबधी परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता, लेकिन ‘क्लीन एयर एक्शन प्लान’ के सख्त क्रियान्वयन से लोगों को थोड़ा सुकून मिल सकता है. सीड ने राज्य सरकार से क्लीन एयर एक्शन प्लान में कुछ नए उपायों को जोड़ने पर विचार करने की अपील की है, ताकि यह ज्यादा प्रभावी बन सके और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके. अन्य सिफारिशों तथा कदमों में अंतरराज्यीय और क्षेत्रीय स्तर पर ‘रिजनल एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ के दायरे को बढ़ाना और राज्य के भीतर ‘अंतर-नगरीय समन्वयन’ पर ठोस तरीके से काम करना हो सकते हैं. एक्शन प्लान में प्रदूषित धूलकणों की सघनता को वर्ष 2024 तक 30 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अंतरिम तौर पर मापदंड संबंधी लक्ष्य योजना में नहीं दिखती है.

सीड सुनिश्चित करेगा कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाए गए कदमों के साथ दक्ष तथा प्रभावी सुरक्षा उपाय उठाए जाएं और बिहार सरकार को आश्वस्त किया कि क्लीन एयर एक्शन प्लान के क्रियान्वयन की दिशा में हरसंभव मदद और सहयोग देने में सीड हमेशा प्रतिबद्ध रहेगा. 

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