आर एल चंदापुरी की पुण्यतिथि पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन, पिछड़े-अतिपिछड़े वर्गों की दिशा व दशा पर हुई चर्चा

आर एल चंदापुरी की पुण्यतिथि पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन, पिछड़े-अतिपिछड़े वर्गों की दिशा व दशा पर हुई चर्चा

PATNA : प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी व भारतव्यापी पिछड़ा वर्ग आंदोलन के सूत्रधार त्यागमूर्ति आर एल चंदापुरी की 17 वी पुण्यतिथि पर उन्हें कई सामाजिक व बौद्धिक संगठनों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर आज यहां अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के केंद्रीय कार्यालय में पिछड़े-अतिपिछड़े वर्गों की दिशा व दशा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बुद्धिजीवियों ने कहा कि आज सरकारें संविधान के अनुरूप नहीं। बल्कि उनके गलत नीतियों के तहत गैर संवैधानिक तरीके से संचालित हो रही है। जिसके चलते सामाजिक,आर्थिक व राजनेतिक एकरूपता का सिद्धांत जो पिछड़े-अतिपिछड़े व गरीबों के उत्थान के लिए संविधान में समायोजित किए गए थे। वह आजादी के 74 वर्ष बीत जाने के बावजूद मात्र एक दूर का सपना बन गया है।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने पिछड़े-अतिपिछड़े को निजी स्वार्थ का बलिदान कर जाति से उपर उठकर वर्ग की संरचना का निर्माण करने तक सम्पूर्ण संवैधानिक हकों की प्राप्ति के लिए त्यागमूर्ति चंदापुरी की आजादी की दूसरी लड़ाई को तेज करने पर बल दिया गया। अध्यक्षता संघ के प्रधान महासचिव पवनदेव चंद्रवंशी ने की ,जिसकी शुरुआत संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहन भगत मालाकार उर्फ भंते जी के बौद्धिक उच्चारणों तथा त्यागमूर्ति चंदापुरी के चित्र पर माल्यार्पण द्वारा की गई। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंदापुरी ने कहा कि संघ गांधी युग से जुड़ा है तथा आजादी प्राप्ति के साथ भारत की नींव और लोकतंत्र की जड़ें मजबूत की है। उन्होंने पिछड़े-अति पिछड़े के जातिवार जनगणना कराने तथा उनकी आबादी के अनुसार सरकारी अर्धसरकारी और निजी क्षेत्रों में आरक्षण कोटा को बढ़ाने के लिए संघ के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए 8 सूत्री प्रस्तावों पर उनसे शीघ्र नीतिगत फैसले लेने का आग्रह किया।

अतिपिछड़ा वर्ग उत्थान मोर्चा बिहार के संयोजक डॉ धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि त्यागमूर्ति चंदापुरी की खोज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी , डॉ आंबेडकर ,लोहिया जैसे चोटी के नेताओं ने की थी। इनके नाम में निर्मित शोध संस्थान को सरकारी भूमि या भवन शीघ्र आवंटित करने की मांग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की। अति पिछड़ा पदाधिकारी कल्याण समिति बिहार के उपाध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार ने कहा कि त्यागमूर्ति चंदापूरी ने विद्यार्थी जीवन से ही वर्ग व जातिविहीन तथा समतामूलक समाज के निर्माण के लिए कटिबद्ध रहे व एकता स्थापित कर मिसाल कायम किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संघ के प्रधान महासचिव पवनदेव चंद्रवंशी ने बताया कि त्यागमूर्ति ने 18 नवंबर 1948 को डॉ आंबेडकर से मुलाकात कर पिछड़ी जाति के बजाय पिछड़ा वर्ग की अवधारणा प्रस्तुत की। जिसे डॉ आंबेडकर ने स्वीकार किया तथा संविधान में सम्मिलित किया। भारतीय मोमिन फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ महबूब आलम अंसारी ने कहा कि त्यागमूर्ति चंदापुरी दलितों ,पिछड़ों व अल्पसंख्यकों की स्थिति में सुधार लाने के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष करते रहे,कई बार जानलेवा हमला कर उन्हे घायल किया गया किंतु वे कभी भी अपने पथ से विचलित नहीं हुए।

संगोष्ठी को संघ की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष सुनीता साक्षी,नोनिया चौहान सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष दर्शन कुमार बबलू,बिहार प्रजापति समन्वय समिति के अध्यक्ष दानी प्रजापति,कानू विकास संघ के महासचिव कृष्णनंदन शाह,सिंदुरिया कैथल कठबानिया महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सुभाष प्रसाद व कोषाध्यक्ष सुबोध कुमार,संयुक्त नाई एकता महासंघ के अध्यक्ष जयेश कुमार,कर्पूरी सेना के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव मुन्ना निषाद,बौद्धिक चिंतक डॉ एम पाल ,प्रफुल्ल चंद्र पाल,शिवाजी सेना के रविशंकर मंडल, संघ की प्रदेश महिला अध्यक्ष शांति शाह, राष्ट्रीय महासचिव सिपाही यादव, रा. महासचिव ई. बी बी सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक सिंह, रा. उपाध्यक्ष कर्मवीर आजाद, प्रदेश उपाध्यक्ष डी पी साहू,अधिवक्ता राजीव रंजन सिंह,अधिवक्ता महेश प्रसाद,  महासचिव शशिभूषण प्रसाद,समाजसेवी नवल गुप्ता, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र कु.चंद्रवंशी,विकास चंद्रवंशी आदि ने संबोधित किया।

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