बेशर्म सरकार! जनता मरती है तो मरे-सरकारी राशि 'लुटाना' ही सुशासन राज का लक्ष्य, वेटिंलेटर तो मंगा लिए चालू करने से किसने रोका था?

बेशर्म सरकार! जनता मरती है तो मरे-सरकारी राशि 'लुटाना' ही सुशासन राज का लक्ष्य, वेटिंलेटर तो मंगा लिए चालू करने से किसने रोका था?

पटनाः बिहार में सिर्फ कहने के लिए सुशासन की सरकार है हकीकत में तो जंगलराज से भी एक कदम आगे। सुशासन राज में सरकारी राशि दिखावे के लिए लुटा दी जाती है। सरकार सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करती है और पब्लिक की सुविधा के नाम पर पानी तरह पैसे बहाती है। बिहार में ऐसी सरकार है जिसे सिर्फ खरीददारी और बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनाने में विश्वास है। जनता की जान जाती है तो जाए उसे क्या मतलब....। बजट की राशि तो खर्च हो ही गई,फायदा मिले या नहीं इससे सरकार को क्या मतलब। बिहार के इस बेशर्म सिस्टम को देख-सुन कर शर्म भी शरमा जाएगी।

वेंटिलेटर पर पैसा पानी की तरह बहाया पर चालू नहीं कराया

पिछले साल कोरोना काल में जिस वेंटिलेटर के लिए सीएम नीतीश से लेकर स्वास्थ्य मंगल पांडेय ने कई दफे पीएम मोदी से गुहार लगाई थी। काफी प्रयास के बाद केंद्र ने बिहार को वेंटिलेटर दिया। साथ ही बिहार सरकार ने भी अपने पैसे से वेंटिलेटर खरीदे। लेकिन जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से खरीदे गए वेंटिलेटर का क्या हुआ सीएम नीतीश और मंगल पांडेय ने खोज-खबर लेने की कोशिश नहीं की। अब जब कोरोना का संक्रमण दूबारा हो गया तो कथित सुशासनी सरकार की पोल खुल गई। पोल खुलते हीं सीएम नीतीश और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की कलई खुल गई। सुशासन की सरकार की ऐसी पोल खुली की शर्म भी शरमा जाए. आखिर सिस्टम ने ऐसा काम जो किया था.......।

सरकार का एक मात्र लक्ष्य पैसा खर्च करना, पब्लिक मरती है तो मरे.....

दरअसल कोरोना काल में बिहार में सैकड़ों वेंटिलेटर आये। पानी की तरह पैसे बहाकर आनन-फानन में वेंटिलेटर खरीदे गये थे । मकसद था कि कोरोना संक्रमण से मर से मरीजों को बचाना। कोरोना के पहला संक्रमण कम होते ही सरकार दर्द भूल गई। करोड़ों की राशि खर्च कर जो वेंटिलेटर मंगाये गए थे उसे पटना के अलावे जिलों में भी भेजा गया। लेकिन उस वेंटिलेटर का क्या हुआ इसकी खोज-खबर किसी ने नहीं ली। लिहाजा जो सामान जिलों में भेजे गए थे वो छह महीना से उसी तरह पड़े हुए हैं। उस वेंटिलेटर से अभी तक पॉलथिन भी नहीं हटे और अस्पताल के गोदाम में रखे-रखे खराब हो रहा। जमुई,बांका,बेतिया समेत कई अन्य जिलों से ये खबर आई है कि जो वेंटिलेटर भेजे गए उसे अब तक इंस्टॉल ही नहीं किया गया।

सुशासन शब्द से बिहार के लोगों को घिन्न आ रही

सुशासन की सरकार में अधिकारी और मंत्री इतने व्यस्त हो गए कि किसी ने इसकी पड़ताल नहीं की। अधिकांश जिलों में वो वेंटिलेटर गोदाम में शोभा की वस्तु बन कर रह गई है। मतल सरकार का पैसा भी खर्च हो गया और पब्लिक को कोई लाभ भी नहीं मिल रहा। कोरोना संक्रमण के दूसरे काल में सुशासन की इस सरकार की करनी की पोल खुल रही है। जब सरकार की भद्द पिटी है तो अधिकारी और मंत्री को मुंह से आवाज नहीं निकल रहा। अब मुख्यमंत्री ने सभी वेंटिलेटर को चालू कराने का निर्देश दिया है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार के सभी जिलों के अस्पतालों में उपलब्ध वेंटिलेटर को शीघ्र क्रियाशील करने का निर्देश दिया है। यह कार्य सरकारी प्रयास अथवा निजी क्षेत्र की संयुक्त भागीदारी से सुनिश्चित किया जा सकेगा। 

सीएम नीतीश के मित्र पूर्व मंत्री ने लगाई गुहार

 बिहार में कोरोना से लोग मर रहे हैं। अस्पताल में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी जान जा रही है। पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा है। जमुई सदर अस्पताल के कैंटीन नया वेंटिलेटर शोभा की वस्तु बन कर रह गई है। सदर अस्पताल में उपलब्ध छह वेंटिलेटर आज भी बेकार पड़ा है और कैंटीन में पड़े-पड़े धूल फांक रहा है। तकनीकी कर्मियों की कमी की वजह से इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। कोरोना काल में वेंटिलेटर का कितना महत्व है, यह किसी संक्रमित की उखड़ती सांस बता देती है।सीएम नीतीश के मित्र और कैबिनेट के पुराने सहयोगी नरेन्द्र सिंह ने नीतीश सरकार के स्वास्थ्य सचिव प्रत्यय अमृत को पत्र लिखकर हैरानी व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द जमुई सदर अस्पताल में बेकार पड़े वेंटीलेटर को उपयोग में लाया जाए ताकि कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचायी जा सके। पूर्व कृषि मंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रदेश में 99 प्रतिशत स्थानों पर ऑक्सीजन की कमी तो है हीं. साथ ही साथ वेंटिलेटर की भी कभी है। जिन अस्पतालों में वेंटिलेटर है तो उसे चलाने वाला ऑपरेटर नहीं है। उन्होंने जमुई सदर अस्पताल का उल्लेख करते हुए लिखा है कि जमुई अस्पताल में कई वेंटीलेटर हैं किंतु टेक्निशियन नहीं है। जिस कारण वेंटिलेटर शोभा की वस्तु बनकर रह गया. उन्होंने स्वास्थ्य सचिव से अनुरोध किया है कि बड़े पैमाने पर टेक्नीशियन को बहाल कर वेंटिलेटर को उपयोग में लाया जाए और अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की व्यवस्था शीघ्र कराई जाए ताकि कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचायी जा सके।



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