शरद यादव के नाम है ऐसा राजनीतिक रिकॉर्ड जिसे देश का कोई नेता नहीं तोड़ पाया, जानिए शरद का सबसे रोचक सियासी इतिहास

शरद यादव के नाम है ऐसा राजनीतिक रिकॉर्ड जिसे देश का कोई नेता नहीं तोड़ पाया, जानिए शरद का सबसे रोचक सियासी इतिहास

पटना. शरद यादव के निधन पर बिहार सहित देश के कई राज्यों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक जताया है. चार दशक से ज्यादा के राजनीतिक सफर में शरद यादव के नाम कई राजनीतिक उपलब्धियां रहीं. इसमें एक ऐसी उपलब्धि रही जो उनके नाम से राजनीतिक इतिहास बन चुका है. शरद यादव ने मध्य प्रदेश में पैदा होने के बाद भी बिहार में अपनी कर्मभूमि बनाई और बिहार के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में हुए. उन्होंने मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र से कई बार सांसद बनने का गौरव हासिल किया. 

लेकिन इन सबसे अलग शरद यादव ने नाम जो राजनितीक उपलब्धि है वह है उनके तीन राज्यों से सांसद बनने का रिकॉर्ड. शरद यादव ने पहली बार मध्य प्रदेश के जबलपुर से वर्ष 1974 से लोकसभा का चुनाव जीता. लेकिन उसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के बदले खुद को उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय कर लिया. जेपी आंदोलन के बाद जब देश में राजनीतिक परिदृश्य बदला तो शरद यादव भी अपनी राजनीति को बदल चुके थे. उन्होंने 1989 में उत्तर प्रदेश के बदाऊं लोकसभा सीट से चुनाव जीता. लेकिन उसके बाद उन्होंने बिहार की राजनीति में कदम बढ़ाया. 

वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बिहार में कदम बढ़ाया. तब जनता दल के नेता के रूप में लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे. शरद यादव ने मधेपुरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. वे देश के पहले नेता बने जो तीन अलग अलग राज्यों से सांसद बने. इतना ही नहीं शरद मधेपुरा से वर्ष 1991 से 2014 तक लोकसभा के सांसद रहे. इस दौरान उन्होंने 1999 के लोकसभा चुनाव में लालू यादव को भी मधेपुरा में हराया जबकि उस समय लालू की पत्नी राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थी. हालांकि 2014 के चुनाव में शरद यादव को मधेपुरा में पप्पू यादव से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद भी तीन राज्यों से लोकसभा सदस्य बनने वाले वे देश के एकलौते सांसद हुए. 

इतना ही नहीं शरद को राज्यसभा संसद बनने का भी मौका मिला. वे पहली बार 1986 में राज्यसभा सांसद चुने गए. उसके बाद उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद दोबारा जदयू सांसद के तौर पर बिहार से राज्यसभा सदस्य बनाकर भेजा गया. बाद में नीतीश कुमार से रिश्ता खराब होने के कारण शरद की राज्यसभा सदस्यता बीच में ही चली गई. वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें मधेपुरा में हार का सामना करना पड़ा.


Find Us on Facebook

Trending News